मिथिलेश लखनवी के शिष्यों संग चंदन दास भी बिखेरेंगे सुरों का जादू

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लखनऊ। अपनी तहज़ीब, अदब और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में पहचान रखने वाला लखनऊ एक बार फिर ग़ज़लों की मधुर फिज़ा से महकेगा। शांति सांस्कृतिक कला केंद्र की ओर से 25 जुलाई 2026 को कैसरबाग स्थित कला मंडपम प्रेक्षागृह (भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के सामने) में एक विशेष ग़ज़ल संध्या का आयोजन किया जाएगा।

इस आयोजन में वरिष्ठ ग़ज़ल गायक मिथिलेश लखनवी के मार्गदर्शन में तैयार हुए नए ग़ज़ल गायकों की प्रस्तुतियों के साथ मुंबई के सुप्रसिद्ध ग़ज़ल गायक चंदन दास भी अपनी यादगार ग़ज़लों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।

मिथिलेश लखनवी पिछले लगभग 40 वर्षों से ग़ज़ल गायकी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने न केवल लखनऊ, बल्कि देश और विदेश में भी अपनी गायकी से विशेष पहचान बनाई है। कला और कलाकारों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शांति सांस्कृतिक कला केंद्र लगातार विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करता रहा है।

इसी क्रम में पिछले ढाई माह से मिथिलेश लखनवी के निर्देशन में ग़ज़ल गायन कार्यशाला संचालित की जा रही है। इस कार्यशाला में शामिल प्रतिभागी पेशेवर ग़ज़ल गायक नहीं हैं, बल्कि ग़ज़ल गायकी के प्रति रुचि रखने वाले नए कलाकार हैं, जिन्हें मिथिलेश लखनवी सुर, लय और अदायगी की बारीकियां सिखाकर उनके हुनर को निखार रहे हैं।

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कार्यक्रम में प्रतिभागी अहमद फ़राज़, निदा फ़ाज़ली, शमीम जयपुरी, कैफ़ी आज़मी, मीर तकी मीर और कृष्ण बिहारी नूर जैसे महान शायरों की चुनिंदा ग़ज़लें प्रस्तुत करेंगे।

इस अवसर को और भी खास बनाने के लिए मुंबई से प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक चंदन दास विशेष रूप से लखनऊ आ रहे हैं। कई वर्षों बाद लखनऊ पहुंच रहे चंदन दास न केवल कार्यशाला के प्रतिभागियों की प्रस्तुतियां सुनेंगे,

बल्कि अपनी लोकप्रिय ग़ज़लों से भी श्रोताओं को एक यादगार संगीत संध्या का उपहार देंगे। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की है कि लखनऊ में ग़ज़ल जैसी समृद्ध विधा को आगे बढ़ाने के लिए इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित की जा रही है।

ग़ज़ल प्रेमियों और संगीत रसिकों के लिए यह कार्यक्रम एक विशेष अवसर होगा। आयोजकों ने सभी संगीत प्रेमियों से 25 जुलाई की शाम कला मंडपम प्रेक्षागृह, कैसरबाग में आयोजित इस ग़ज़ल संध्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम का आनंद लेने की अपील की है।

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