योगासन में पारदर्शिता व सुशासन की नई उम्मीद, हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत

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साभार : गूगल

नई दिल्ली : भारत में प्रतिस्पर्धात्मक योगासन के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित सबसे पुराने संगठनों में से एक, योग फेडरेशन ऑफ इंडिया (वाईएफआई) ने घोषणा की है कि

वह दिल्ली उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से नई मान्यता प्राप्त करने तथा भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के साथ अपनी मान्यता बहाल करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू करेगा।

एक महत्वपूर्ण निर्णय में दिल्ली उच्च न्यायालय ने योगासन भारत को योगासन के राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) के रूप में दी गई मान्यता को निरस्त करते हुए युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय को राष्ट्रीय खेल विकास संहिता (नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट कोड) के अनुरूप एक नई, पारदर्शी और विधिसम्मत मान्यता प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है।

फेडरेशन का मानना है कि यह निर्णय भारतीय खेल प्रशासन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे यह सुनिश्चित करने का अवसर मिलेगा कि भविष्य में योगासन का प्रशासन वैधता, जवाबदेही, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और सभी पात्र संगठनों के लिए समान अवसर जैसे सिद्धांतों पर आधारित हो।

वर्ष 1974 में स्थापित योग फेडरेशन ऑफ इंडिया पिछले पांच दशकों से अधिक समय से प्रतिस्पर्धात्मक योगासन के विकास में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।

फेडरेशन ने लगातार जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है, तकनीकी मानकों का विकास किया है, अधिकारियों एवं खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया है तथा योगासन को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में कार्य किया है।

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न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप फेडरेशन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के समक्ष नई मान्यता के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत करेगा तथा साथ ही भारतीय ओलंपिक संघ के साथ अपनी संबद्धता बहाल करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ करेगा।

फेडरेशन को विश्वास है कि नई मान्यता प्रक्रिया राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूपपूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी पात्र आवेदकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करते हुए संचालित की जाएगी।

अपनी तात्कालिक कार्य योजना के तहत फेडरेशन भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी. ऊषा तथा केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेलमंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से मुलाकात का अनुरोध करेगा।

इन बैठकों में योगासन के दीर्घकालिक विकास की अपनी रूप रेखा प्रस्तुत की जाएगी तथा संस्थागत मान्यता की बहाली और देशभर में इस खेल को सशक्त बनाने के रोडमैप पर चर्चा की जाएगी।

इस विषय पर योग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्धगुप्ता ने कहा, “माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय योगासन के भविष्य को पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुशासन के आधार पर मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

योग फेडरेशन ऑफ इंडिया नई मान्यता प्रक्रिया में पूरी निष्ठा के साथ भाग लेगा और भारतीय ओलंपिक संघ के साथ अपनी संबद्धता बहाल करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ करेगा। हमारा मुख्य ध्यान हमारे खिलाड़ियों पर है।

11वीं एशियाई योग चैंपियनशिप 2027 की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं और हम एक मजबूत भारतीय टीम तैयार करने के साथ-साथ युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ और सभी हितधारकों के सहयोग से भारत को प्रतिस्पर्धात्मक योगासन का वैश्विक अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

मान्यता प्रक्रिया के समानांतर फेडरेशन ने दोहराया कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता खिलाड़ियों का विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगासन का निरंतर विस्तार है।

एशियन योग फेडरेशन द्वारा आयोजित की जाने वाली 11वीं एशियाई योग चैंपियनशिप 2027 की तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं, जिसमें एशिया के 17 देशों की राष्ट्रीय फेडरेशन के भाग लेने की संभावना है।

योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस प्रतिष्ठित महाद्वीपीय प्रतियोगिता के लिए मजबूत भारतीय दल की पहचान, चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

फेडरेशन ने पुनःस्पष्ट किया कि भारतीय योगासन का भविष्य पारदर्शी प्रशासन, लोकतांत्रिक संस्थाओं, खिलाड़ी-केंद्रित नीतियों और कानून के शासन के प्रतिपूर्ण प्रतिबद्धता पर आधारित होना चाहिए।

फेडरेशन ने विश्वास व्यक्त किया कि माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित नई मान्यता प्रक्रिया योगासन प्रशासन की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगी तथा भारतीय खिलाड़ियों को दीर्घकालिक खेल उत्कृष्टता के लिए एक स्थिर, पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मंच उपलब्ध कराएगी।

इस विषय पर योग फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव डॉ. अभिनव जोशी ने कहा, “वर्ष 1974 में अशोक कुमार अग्रवाल सहित कई दूरदर्शी व्यक्तित्वों द्वारा स्थापित योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने पांच दशकों से अधिक समय तक प्रतिस्पर्धात्मक योगासन के विकास और खिलाड़ियों के हितों के लिए समर्पित होकर कार्य किया है।

हमने वर्ष 2019 में भारत सरकार द्वारा योगासन को खेल के रूप में मान्यता देने और एकीकृत राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने की पहल का स्वागत किया था।

हालांकि, हमारे विचार में यह प्रक्रिया अंततः उस व्यापक, समावेशी और लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था को स्थापित नहीं कर सकी जिसकी लंबे समय से कार्यरत योग संगठनों को अपेक्षा थी।

हमारा मानना है कि यह व्यवस्था पतंजलि योग और बाद में योगासन भारत के प्रभाव में चली गई तथा योगासन भारत वस्तुतः ‘योगासन पतंजलि’ बनकर रह गया। इसी कारण योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उस प्रक्रिया से स्वयं को अलग कर लिया था।  अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक नई शुरुआत का मार्ग प्रशस्त किया है।

हम युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से आग्रह करते हैं कि नई मान्यता प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप संचालित की जाए। हमें पूर्ण विश्वास है कि एक निष्पक्ष प्रक्रिया अंततः भारतीय योग खेल और सबसे बढ़कर उसके खिलाड़ियों के हित में होगी।”

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