सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (CIMAP), लखनऊ में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 7-10 जुलाई, 2026 के मध्य आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण “औषधीय एवं सगंध पौधों के उत्पादन, प्राथमिक प्रसंस्करण एवं विपणन” विषय पर केंद्रित है।
15 राज्यों से 77 प्रतिभागियों की भागीदारी
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम मे देश के 15 राज्यों से 77 किसान जिसमे 13 महिला किसान, कृषि उद्यमी और ग्रामीण युवा भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान मेंथा, खस, तुलसी, लेमनग्रास और एलोवेरा जैसी फसलों की वैज्ञानिक खेती की जानकारी प्राथमिक प्रसंस्करण: पौधों से तेल निकालने और उनके सुरक्षित भंडारण (Storage) की आधुनिक तकनीकें, तथा विपणन (Marketing): तैयार उत्पादों को सीधे सही बाजार और उद्योगों तक बेचने के गुर बताए जायेंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन आज दिनांक 7 जुलाई, 2026 को किया गया।

डॉ. संजय कुमार, मुख्य वैज्ञानिक व समन्वयक, प्रशिक्षण कार्यक्रम ने प्रतिभागियों का स्वागत किया एवं प्रशिक्षण की रूपरेखा के बारे में बताया और कहा कि चार दिन चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीमैप के वैज्ञानिक आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती पर विस्तार से चर्चा करेंगे तथा साथ ही प्रसंस्करण एवं भंडारण की तकनीकियों पर भी चर्चा करेंगे जिससे किसानों के उत्पादन को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता का बनाया जा सके और उसका अधिक तथा उचित मूल्य किसानों को मिल सकें। इन औषधीय एवं सगंध फसलों में मुख्यतः नीबूघास, पामारोजा, जिरेनियम, तुलसी इत्यादि हैं। वर्तमान में इनके तेलों की मांग विश्व बाज़ार में वृद्धि हुई है।
संस्थान के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने अपने संदेश में कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर उनकी आय एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-सीमैप वैज्ञानिक अनुसंधान को किसानों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है, ताकि नवीन प्रौद्योगिकियों का लाभ सीधे कृषकों को मिल सके।
तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को मेंथा के उत्पादन की उन्नत कृषि तकनिकियाँ, कैमोमिल एवं ईसबगोल की वैज्ञानिक खेती, जावाघास, खस व गुलाब के उत्पादन की उन्नत कृषि क्रियाओं आसवन एवं मूल्य संवर्धन की जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर सीएसआईआर-सीमैप के विभिन्न वैज्ञानिक, तकनीकी अधिकारी व शोधार्थी आदि उपस्थित रहे।













