लखनऊ। हिंदी पखवाड़ा-2026 के समापन समारोह के अवसर पर सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई), लखनऊ में हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
राजभाषा विभाग, सीएसआईआर-सीडीआरआई एवं उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, लखनऊ के सहयोग से आयोजित कवि सम्मेलन में करीब 450 श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं का आनंद लिया। खचाखच भरे सभागार में कवियों की प्रस्तुतियों पर तालियों और ठहाकों की गूंज सुनाई देती रही। कार्यक्रम का संचालन कवि पंकज प्रसून ने किया।
कवि अशोक झंझटी ने रिश्तों और बदलते मानवीय व्यवहार पर अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को सोचने के साथ मुस्कुराने का अवसर दिया। उन्होंने मानवीय रिश्तों में बढ़ती दूरियों और बदलते व्यवहार को अपनी कविता के माध्यम से सामने रखा।
कमल आग्नेय ने विज्ञान, आत्मविश्वास और भारत के बढ़ते सामर्थ्य को अपनी कविता का विषय बनाया। चंद्रयान और सूर्ययान के संदर्भों के साथ उन्होंने देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों और आत्मविश्वास को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे पंकज प्रसून ने सोशल मीडिया और बदलती डिजिटल दुनिया पर अपने चुटीले अंदाज में श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनके व्यंग्यात्मक प्रस्तुतीकरण पर सभागार में जमकर ठहाके लगे।
शिखा श्रीवास्तव ने प्रेम और रिश्तों की संवेदनशीलता को अपनी रचनाओं के माध्यम से स्वर दिया। उनकी कविता में रिश्तों में अपनापन, विश्वास और जीवन में एक-दूसरे के सहारे की भावना उभरकर सामने आई।
मुकुल महान ने चाय, अखबार, प्रेम और जिंदगी के सफर को अपनी रचना में पिरोते हुए श्रोताओं को अलग अंदाज में बांधे रखा। वहीं हेमंत पांडेय ने अपने हास्यपूर्ण अंदाज से श्रोताओं को खूब हंसाया और उनकी प्रस्तुति पर लगातार तालियां बजती रहीं।
कार्यक्रम के दौरान चीफ वैज्ञानिक डॉ. राजकमल श्रीवास्तव ने सभी कवियों को सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक सर्वेश कुमार सिंह की भी कार्यक्रम में सहभागिता रही। इस अवसर पर हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार के साथ वैज्ञानिक संस्थानों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीडीआरआई के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य अतिथियों सहित करीब 450 लोग मौजूद रहे। हास्य, व्यंग्य और काव्य की विविध प्रस्तुतियों से सजा कवि सम्मेलन श्रोताओं के लिए यादगार रहा।
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