हाईलाइट्स
- PHYSEM-2026 में चार सौ से अधिक फिजियोथेरेपिस्टों ने लिया हिस्सा
- स्ट्रोक, न्यूरोलॉजिकल और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के उपचार में वाइब्रेशन साइंस की भूमिका पर हुई चर्चा
लखनऊ। फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और उपचार की नई संभावनाओं पर चर्चा के लिए होटल रेग्नेंट में तृतीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार PHYSEM-2026 का आयोजन किया गया।
लंदन अकादमी ऑफ स्पोर्ट्स एंड हेल्थ साइंस और मयोफंक्शनल पोस्टुरल रिहैबिलिटेशन साइंस, स्पेन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार में देश-विदेश के चार सौ से अधिक फिजियोथेरेपिस्टों ने हिस्सा लिया।
इसमें स्ट्रोक, न्यूरोलॉजिकल और आर्थोपेडिक समस्याओं के उपचार में वाइब्रेशन साइंस सहित आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। सेमिनार का उद्घाटन वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने किया।
इस अवसर पर अतिथि के रूप में महिला आयोग की सचिव अपर्णा यादव और इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट की नेशनल हेड एवं आईएपीडब्ल्यूसी की कोषाध्यक्ष डॉ. रुचि वाष्णेय मौजूद रहीं।
मुख्य वक्ता लंदन अकादमी ऑफ स्पोर्ट्स एंड हेल्थ साइंस, यूके के एसोसिएट डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सैय्यद मोहम्मद वारिस ने वाइब्रेशन साइंस और आयन थेरेपी तकनीक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का उपयोग स्ट्रोक और तनाव से जुड़ी समस्याओं के उपचार में किया जा सकता है।
डॉ. वारिस ने विभिन्न देशों में इस तकनीक के माध्यम से उपचार करने के अपने अनुभव साझा किए। साथ ही बताया कि वह कई फिजियोथेरेपिस्टों को इस आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। भारत में इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन तीसरी बार किया जा रहा है।
डॉ. वारिस ने आयोजक सचिव डॉ. संजय शुक्ला को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन नियमित रूप से होने चाहिए। इससे फिजियोथेरेपिस्टों को उपचार की नई तकनीकों की जानकारी मिलती है और विभिन्न गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में फिजियोथेरेपी की भूमिका को समझने का अवसर मिलता है।
सेमिनार में डॉ. सैफ सईद अल रियामी, प्रो. सिल्वेरियो डे रोक्को, डॉ. राजेन्द्र कुमार, डॉ. धरम पाण्डेय, डॉ. सुमित अस्थाना, डॉ. रानू सिंह और डॉ. योगेश मध्यान ने भी विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।
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विशेषज्ञों ने लंबे समय से बने रहने वाले दर्द के उपचार में फिजियोथेरेपी की उपयोगिता के साथ व्यस्त जीवनशैली के कारण होने वाली शारीरिक समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की।
सेमिनार के कोषाध्यक्ष डॉ. विष्णु मूर्ति पाठक ने कहा कि मौजूदा चिकित्सा व्यवस्था में फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं, डॉ. नम्रता सूरी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कंपनियों ने फिजियोथेरेपी के आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई। इसके अलावा शहर के फिजियोथेरेपिस्टों को अलग-अलग उपाधियों से सम्मानित किया गया।












