हाईलाइट्स
- सीडीआरआई में SBC(I) की 95वीं वार्षिक बैठक का समापन
- शोधार्थियों को दिए गए पुरस्कार
लखनऊ। तपेदिक की जीनोमिक निगरानी, जीन थेरेपी के लिए स्वदेशी CRISPR-Cas9 तकनीक, कीट प्रतिरोधी कपास और लैक्टोफेरिन आधारित आणविक चिकित्सा। जैव चिकित्सा और जीवन विज्ञान के इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रहे शोध और उनकी संभावनाओं पर वैज्ञानिकों ने अपने विचार साझा किए।
यह चर्चा सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ में आयोजित सोसाइटी ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्स (इंडिया) [SBC(I)] की 95वीं वार्षिक बैठक के तीसरे और अंतिम दिन हुई।
वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने बताया कि आणविक स्तर पर रोगों को समझने और नई तकनीकों के विकास से मानव स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण तथा कृषि क्षेत्र में किस तरह नई संभावनाएं बन रही हैं।
सीएसआईआर-कोशिकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) के निदेशक डॉ. विनय नंदिकूरी ने तपेदिक के आणविक तंत्र और जीनोमिक निगरानी पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने बताया कि तपेदिक के कारणों और उसके जैविक तंत्र को समझने के साथ जीनोमिक निगरानी रोग की पहचान, प्रसार पर नजर रखने और नियंत्रण की रणनीतियां मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सीएसआईआर-जीनोमिक्स एवं समेकित जीव विज्ञान संस्थान (आईजीआईबी) के डॉ. सौविक मैती ने स्वदेशी CRISPR-Cas9 तकनीक के जरिए जीन थेरेपी को अधिक सटीक बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने जीन संपादन के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक के विकास और इसके अनुसंधान एवं उपचार संबंधी उपयोगों की जानकारी दी।
कृषि जैव प्रौद्योगिकी पर केंद्रित सत्र में सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) के डॉ. पी. के. सिंह ने गुलाबी सुंडी से कपास की फसल को बचाने के लिए Bt प्रोटीन के अभियांत्रिकीकरण पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने प्रोटीन अभियांत्रिकी और जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से कीट प्रतिरोधी ट्रांसजेनिक कपास विकसित करने की संभावनाएं बताईं।
वहीं, एम्स नई दिल्ली की डॉ. सुजाता शर्मा ने मां के दूध में पाए जाने वाले बहुक्रियाशील प्रोटीन लैक्टोफेरिन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इसकी आणविक संरचना, जैविक कार्यों और रोगी देखभाल में इसके संभावित चिकित्सकीय उपयोगों के बारे में जानकारी साझा की।
कई समकालीन शोध विषयों पर हुई चर्चा
अंतिम दिन आयोजित अन्य वैज्ञानिक सत्रों में जैव चिकित्सा आधारित उपचार, संरचनात्मक जैव रसायन, विषाणु एवं फेज थेरेपी, परजीवी जीव विज्ञान और जीवन की उत्पत्ति एवं विकास में आरएनए की भूमिका जैसे विषय शामिल रहे।
इसके अलावा जीवाणु संक्रमण, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR), सटीक चिकित्सा, जीनोमिक्स और मेटाजीनोमिक्स पर भी विचार-विमर्श हुआ।
जैव रसायन और औषधि खोज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग के उपयोग तथा पादप जीव विज्ञान और पौधों की रक्षा से जुड़े शोध भी चर्चा के केंद्र में रहे।
तीन दिवसीय वार्षिक बैठक का समापन विद्यार्थी पुरस्कार समारोह और समापन सत्र के साथ हुआ। इस दौरान शोधार्थियों को उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
आयोजन में देश के विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। बैठक ने जैव रसायन और जीवन विज्ञान के क्षेत्र में नए शोध, वैज्ञानिक संवाद तथा आपसी सहयोग के लिए मंच प्रदान किया।
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