वैज्ञानिकों को प्रतिष्ठित सम्मान, मलेरिया से कैंसर तक के शोध पर चर्चा

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हाईलाइट्स

  • सीडीआरआई में सोसाइटी ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्स की 95वीं वार्षिक बैठक
  • दूसरे दिन माइक्रोबायोम, तंत्रिका जीवविज्ञान और नैदानिक अनुसंधान पर हुए सत्र

लखनऊ। सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई), लखनऊ में आयोजित सोसाइटी ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्स (इंडिया) की 95वीं वार्षिक बैठक के दूसरे दिन वैज्ञानिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए गए।

इस दौरान जैव रसायन, आणविक जीवविज्ञान और जैव चिकित्सा अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों में हुए नवीन शोध पर चर्चा हुई। वैज्ञानिक सत्रों में माइक्रोबायोम, मलेरिया परजीवी, तंत्रिका जीवविज्ञान, कैंसर की जांच और जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

डॉ. सुनील लक्ष्मण और डॉ. सतीश मिश्रा सम्मानित

वैज्ञानिक कार्यक्रम के अंतर्गत ब्रिक-इनस्टेम (BRIC-InStem) के डॉ. सुनील लक्ष्मण को उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए श्रीनिवासैया मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया।

उन्होंने ‘द सेलुलर मेटाबोलिक इकोनॉमी’ विषय पर व्याख्यान दिया। इसमें कोशिकीय चयापचय की भूमिका और मूलभूत जैविक प्रक्रियाओं को समझने के साथ जैव चिकित्सा अनुसंधान में इसके महत्व पर प्रकाश डाला गया।

वहीं, सीएसआईआर-सीडीआरआई के डॉ. सतीश मिश्रा को प्रो. ए. एन. भादुड़ी मेमोरियल लेक्चर अवार्ड प्रदान किया गया। उन्होंने ‘मॉलिक्यूलर डिटरमिनेंट्स ऑफ प्लाज्मोडियम डेवलपमेंट एंड ट्रांसमिशन’ विषय पर व्याख्यान दिया।

इसमें मलेरिया परजीवी के विकास और उसके संचरण को नियंत्रित करने वाले जैविक तंत्रों पर केंद्रित अनुसंधान को रेखांकित किया गया। ऐसे अध्ययन परजीवी के जीवविज्ञान को बेहतर ढंग से समझने और मलेरिया के विरुद्ध नए उपाय विकसित करने की संभावनाओं की पहचान में सहायक हैं।

माइक्रोबायोम से कैंसर की जांच तक पर हुआ मंथन

बैठक के दूसरे दिन वैज्ञानिकों ने जीवन विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में जारी अनुसंधान पर विचार-विमर्श किया। इनमें माइक्रोबायोम और उसकी अंतःक्रियाएं, कवक एवं परजीवी जैव रसायन, कोशिका एवं विकासात्मक जीवविज्ञान, पादप जीवविज्ञान और रक्षा तंत्र, तंत्रिका जीवविज्ञान एवं वृद्धावस्था, नैदानिक जैव रसायन तथा जैव पदार्थ एवं ऊतक अभियांत्रिकी शामिल रहे।

सत्रों में योनि और मुख के माइक्रोबायोम, अल्सरेटिव कोलाइटिस, मलेरिया-रोधी अवरोधकों तथा अल्जाइमर रोग में आंत के माइक्रोबायोम की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

इसके साथ ही एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) जीनोटाइपिंग पैनल के माध्यम से गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच से जुड़े अनुसंधान पर भी विचार साझा किए गए।

इन विषयों पर हुई चर्चा में रोगों के जैविक तंत्र को समझने, बेहतर जांच पद्धतियां विकसित करने और संभावित उपचार रणनीतियों की पहचान में बहुविषयक अनुसंधान के महत्व को रेखांकित किया गया।

फ्लैश टॉक में शोधकर्ताओं ने साझा किए निष्कर्ष

वैज्ञानिक सत्रों के साथ फ्लैश टॉक का भी आयोजन किया गया। इसमें शोधकर्ताओं को अपने अनुसंधान कार्यों और प्रमुख निष्कर्षों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस पहल के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने शोध को व्यापक वैज्ञानिक समुदाय के सामने रखा और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया।

बैठक के दूसरे दिन का कार्यक्रम जैव रसायन और जीवन विज्ञान में मूलभूत तथा अनुप्रयुक्त अनुसंधान के बढ़ते दायरे को दर्शाता रहा। विभिन्न वैज्ञानिक विषयों के बीच सहयोग और संवाद के माध्यम से मानव स्वास्थ्य, रोग जीवविज्ञान तथा जैव प्रौद्योगिकी से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।

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