शौर्य, बलिदान और समुद्री पराक्रम की अमर गाथा बनेगी नौसेना शौर्य वाटिका

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लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। लगभग दो एकड़ क्षेत्र में 19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह ओपन-एयर डिस्प्ले संग्रहालय भारतीय नौसेना के साहस, शौर्य और पराक्रम को समर्पित है।

रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटन किया

इसमें आईएनएस गोमती के विभिन्न उपकरणों और हथियार प्रणालियों को प्रदर्शित किया गया है, जिसे 34 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद 29 मई 2022 को सेवामुक्त किया गया था।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि नौसेना शौर्य वाटिका केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रेरणा का ऐसा प्रतीक है जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की वास्तविक कीमत का एहसास कराएगा। उन्होंने कहा कि यह पार्क देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले वीर सैनिकों के साहस और बलिदान की निरंतर याद दिलाएगा।

उन्होंने कहा, “यह केवल एक वास्तुशिल्प संरचना या निर्माण कला का उदाहरण नहीं है, बल्कि हमारे सैनिकों के प्रति कृतज्ञता की भावना को पुनर्जीवित करने का माध्यम है। इसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्र निर्माण के प्रति उत्साह और समर्पण की भावना जगाना है।”

बोले रक्षा मंत्री – सुरक्षित समुद्री मार्ग वैश्विक शांति और समृद्धि की कुंजी

रक्षा मंत्री ने समुद्र में भारतीय नौसेना की मजबूत उपस्थिति और परिचालन तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा ही विश्व शांति और समृद्धि की कुंजी है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के साथ भारतीय नौसेना के उत्कृष्ट योगदान की भी प्रशंसा की।

उन्होंने कहा, “अरब सागर में भारतीय नौसेना की सशक्त मौजूदगी ने दुश्मन के मन में लगातार भय का वातावरण बनाए रखा। परिणामस्वरूप पाकिस्तानी नौसेना अपने बंदरगाहों तक ही सीमित रही।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार मजबूत सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के माध्यम से देश को सुरक्षित और समृद्ध बनाने पर विशेष बल दे रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों की बढ़ती ताकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के सतत प्रयासों और रणनीतिक योजना का परिणाम है।

उन्होंने कहा, “भारत को वास्तव में शक्तिशाली तभी माना जाएगा जब हमारी सेनाओं को हथियारों और रक्षा उपकरणों के लिए अन्य देशों पर निर्भर न रहना पड़े।

यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत का विजन प्रस्तुत किया। मेक इन इंडिया, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) और एडीटीआई (ADITI) जैसी पहलों के माध्यम से हम अत्याधुनिक हथियारों का स्वदेशी निर्माण कर रहे हैं और मित्र देशों को उनका निर्यात भी कर रहे हैं।

मजबूत सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के बल पर सुरक्षित एवं समृद्ध राष्ट्र के निर्माण पर जोर

कभी भारत रक्षा उपकरणों का आयातक देश माना जाता था, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और हमारा रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक के निरंतर प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वर्ष 2014 में जहां देश का रक्षा उत्पादन मात्र 46,000 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और जल्द ही 1.75 लाख करोड़ रुपये के नए रिकॉर्ड को छूने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात भी वर्ष 2014 में 1,000 करोड़ रुपये से कम से बढ़कर आज लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के सैनिक जहां देशभर के जवानों के साथ मिलकर राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहे हैं, वहीं डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर राज्य में रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बना रहा है।

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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार, सड़क, राजमार्ग और हवाई अड्डों जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से प्रगति कर रहा है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा के कारण ही देश का प्रत्येक नागरिक निश्चिंत होकर सो पाता है। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं केवल उसी राष्ट्र में सफल हो सकती हैं जो सुरक्षित और मजबूत हो तथा जिसकी रक्षा उसके सैनिक कर रहे हों।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों के सम्मान और उनके कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता, प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के संकल्प का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य और श्री ब्रजेश पाठक, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित अनेक वरिष्ठ नागरिक एवं सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

नौसेना शौर्य वाटिका के बारे में

इस पार्क में आईएनएस गोमती पर स्थापित एके-726 नौसैनिक तोप, जेडआईएफ-101 सरफेस-टू-एयर मिसाइल लॉन्चर, सरफेस-टू-सरफेस एंटी-शिप और सरफेस-टू-एयर मिसाइल प्रणालियां, जहाज का रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, एंकर, मस्तूल और अन्य महत्वपूर्ण उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं।

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यहां टीयू-142एम (TU-142M) लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान का वॉक-थ्रू संग्रहालय भी बनाया गया है, जो अब सेवा में नहीं है।

नौसेना शौर्य संग्रहालय के द्वितीय चरण के अंतर्गत विकसित इस पार्क में फूड कोर्ट, स्मारिका दुकान तथा आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि व्यवस्था जैसी अनेक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

आईएनएस गोमती के बारे में

आईएनएस गोमती का नाम गोमती नदी के नाम पर रखा गया है। इसे 16 अप्रैल 1988 को तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा मझगांव डॉक लिमिटेड में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।

गोदावरी श्रेणी के निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट्स में यह तीसरा युद्धपोत था और सेवामुक्ति के समय पश्चिमी बेड़े का सबसे पुराना युद्धपोत भी था।

अपने सेवा काल में आईएनएस गोमती ने ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन पराक्रम और ऑपरेशन रेनबो सहित अनेक द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लिया।

समुद्री सुरक्षा में उत्कृष्ट योगदान और उल्लेखनीय सेवा के लिए इसे दो बार प्रतिष्ठित यूनिट साइटेशन से सम्मानित किया गया था—पहली बार वर्ष 2007-08 में और दूसरी बार वर्ष 2019-20 में।

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