सुगंध आधारित खेती, तकनीक को मजबूत बनाने पर सीमैप-एनपीसी का फोकस

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लखनऊ : राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी), नई दिल्ली ने आज सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप), लखनऊ के सुगंध संदेश सभागर में ‘सीएसआईआर -अरोमा मिशन ‘ के प्रभाव आकलन अध्ययन के तहत एक ‘हितधारक परामर्श कार्यशाला’ का सफल आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में प्रमुख हितधारकों, वैज्ञानिकों, नोडल अधिकारियों और अन्य अधिकारियों सहित 50 प्रतिभागियों को एक मंच पर लाया गया, ताकि सुगंध-आधारित प्रौद्योगिकियों की प्रगति और प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जा सके।

कार्यशाला की शुरुआत पंजीकरण के साथ हुई, जिसके बाद एसपी सिंह, निदेशक एवं समूह प्रमुख (कृषि व्यवसाय), राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद द्वारा स्वागत भाषण और सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी द्वारा उद्घाटन भाषण दिया गया, जिन्होंने आलोचनात्मक आकलन और सहयोग से भरे दिन की रूपरेखा तैयार की।

सभा को संबोधित करते हुए सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि प्रभाव आकलन अध्ययन से प्राप्त सुझावों एवं महत्वपूर्ण टिप्पणियों को मिशन के अगले चरण को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु सम्मिलित किया जाएगा।

सत्र में सुनील कुमार सिंह, निदेशक (कृषि व्यवसाय), एनपीसी और डॉ. बजरंग लाल, उप निदेशक (कृषि व्यवसाय), एनपीसी द्वारा प्रभाव आकलन अध्ययन के निष्कर्षों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसके बाद डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में सगंध-आधारित प्रौद्योगिकी विकास पर एक तकनीकी सत्र आयोजित किया गया।

कार्यशाला ने ‘अरोमा मिशन ‘ के कार्यान्वयन पर अग्रणी किसानों, उद्योग संघों और आसवन इकाई मालिकों के दृष्टिकोण को शामिल करते हुए विचारों का एक मजबूत आदान-प्रदान सुनिश्चित किया।

कार्यशाला में वैज्ञानिक ज्ञान की कमी, फसल प्रबंधन, प्रौद्योगिकी उन्नयन, बाजार पहुंच, मूल्य निर्धारण की समस्याएं, मध्यस्थ, परिवहन और भंडारण जैसी प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की गई।

समाधानों में सुगंध तेलों के लिए मजबूत कटाई-पश्चात प्रबंधन तंत्र, प्रसंस्करण और भंडारण सुविधाएं, खरीद-वापसी व्यवस्था, वास्तविक समय मूल्य अपडेट के लिए सीएसआईआर-अरोमा मोबाइल ऐप , और सरकारी अभिसरण योजनाओं के तहत सब्सिडी वाली मशीनरी के माध्यम से प्रौद्योगिकी उन्नयन शामिल हैं।

सीएसआईआर-सीमैप द्वारा आसवित खस (वेटीवर) जड़ों से उच्च मूल्य वाले सक्रिय बायोचार के निर्माण की अभिनव तकनीक का प्रदर्शन किया गया। डॉ. पूजा खरे, डॉ. सुदीप टंडन एवं उनकी टीम द्वारा विकसित इस तकनीक का हस्तांतरण एम/एस सेंटेड रूट्स, सेलम, तमिलनाडु को किया गया।

एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में, कार्यशाला में, सीमैप प्लेटफॉर्म के माध्यम से जिरेनियम प्रजाति सिम -भारत तेल एवं मेंथा पाइपेरिटा प्रजाति कुकरेल तेल की बिक्री यथावत इंडस्ट्री को की गई।

रायबरेली के किसान श्री बीरेंद्र ने अपना उत्पाद सीधे उद्योग को विक्रय कर अरोमा मिशन के अंतर्गत सफल बाजार संपर्क (मार्केट लिंकेज) का उदाहरण प्रस्तुत किया।

कार्यशाला का समापन डॉ. अलोक कालरा (फेलो नासी) के समापन भाषण और एक खुली चर्चा के साथ हुआ, जिसमें मिशन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए एनपीसी, नई दिल्ली और सीएसआईआर- सीमैप के सामूहिक प्रयासों पर प्रकाश डाला गया ।

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