टूटी झोपड़ी से पक्के घर तक: उत्तर प्रदेश के गांवों में सम्मान और सुरक्षा की नई कहानी

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लखनऊ।  कभी बारिश में टपकती छत, सर्दियों में ठिठुरन और गर्मियों में असुरक्षा झेलने वाले उत्तर प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवार आज पक्के घरों में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ के तहत मिली पक्की छत से उनके जीवन स्तर, सामाजिक सम्मान और सुरक्षा की भावना में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। यह उपलब्धि कपोल कल्पना नहीं है, बल्कि शासन के मूल्यांकन प्रभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच कराए गए व्यापक सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है।

प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास योजना से जुड़े लाभार्थियों के जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा का नया अध्याय जुड़ गया है। योजना का लाभ पाने वाले 99.59 प्रतिशत लाभार्थियों ने अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस किया है। सर्वे में शामिल 1,464 परिवारों में से1,457 परिवारों ने माना कि पक्का घर मिलने के बाद उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक प्रदेश के 5 लाख 87 हजार आश्रयहीन ग्रामीण परिवारों को आवास आवंटन किए जा चुके हैं। इनमें 1 लाख 30 हजार दिव्यांगजन और 72 हजार से अधिक निराश्रित महिलाएं (विधवाएं) भी शामिल हैं, जिन्हें अब सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध है।

सर्वेक्षण में पाया गया कि पक्का मकान मिलने के बाद सबसे बड़ा बदलाव सुरक्षा के स्तर पर देखने को मिला। इस अध्ययन में शामिल 84 प्रतिशत लाभार्थियों ने बताया कि अब उन्हें सर्दी, गर्मी और बारिश जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों से बेहतर सुरक्षा मिल रही है। वहीं 77 प्रतिशत परिवारों ने स्वीकार किया कि उनके रहन-सहन और जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आया है।

आवास ने केवल भौतिक सुविधाएँ ही नहीं बढ़ाईं, बल्कि लोगों के आत्मसम्मान को भी नयी पहचान दी है। 71 प्रतिशत लाभार्थी स्वीकारते हैं कि पक्का घर मिलने से समाज में पहले की तुलना में उनका सम्मान बढ़ा है और उन्हें सामाजिक बराबरी का अनुभव हो रहा है। पीढ़ियों तक अध-बने, कच्चे और झोपड़ीनुमा घरों में रहने वाले परिवार अब स्वयं को अधिक सम्मानित और सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

सर्वे में ग्रामीण परिवारों के सम्मान ही नहीं, बल्कि सुरक्षा में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। 68 प्रतिशत लाभार्थियों ने माना कि पहले उनके घरों में सांप, बिच्छू और अन्य जंगली जीवों का खतरा बना रहता था, इसकी वजह से कुछ लोगों की जान भी जा चुकी है, इन सब से अब उन्हें मुक्ति मिल गई है।वे बिल्कुल सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा 27 प्रतिशत परिवारों ने माना कि आवास संबंधी चिंता समाप्त होने के बाद बच्चों की पढ़ाई, परिवार के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन की व्यवस्था में भी आश्चर्यजनक बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उन गरीब परिवारों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आई है, जो विभिन्न कारणों से अन्य आवास योजनाओं का लाभ नहीं प्राप्त कर सके थे। विशेष रूप से वनटांगिया, मुसहर, कोल, थारू, चेरो, कुष्ठ प्रभावित तथा कालाजार एवं जापानी इंसेफेलाइटिस से प्रभावित परिवारों को इस योजना के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

आज यह योजना केवल मकान निर्माण की योजना नहीं रह गई है, बल्कि लगभग 5 लाख, 87 हजार मुख्यमंत्री आवास का आवंटन किया जा चुका है। लाखों गरीब परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार बन चुकी है। पक्की छत ने उनके जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिष्ठा का नया अध्याय जोड़ा है।

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आंकड़े भी बताते हैं बदलाव की कहानी…
शासन के मूल्यांकन प्रभाग द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में योजना के व्यापक प्रभाव सामने आए हैं।
•99.59 प्रतिशत लाभार्थियों ने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस किया।
•84 प्रतिशत परिवारों को मौसम की मार से राहत मिली।
•68 प्रतिशत ने जहरीले जीव-जंतुओं और जंगली जानवरों के खतरे में कमी बताई।
•71 प्रतिशत लाभार्थियों ने सामाजिक सम्मान में वृद्धि महसूस की।
•27 प्रतिशत परिवारों ने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव की बात कही।

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