आर्थिक तंगी के बीच क्रिकेट का जुनून, शक्ति वर्मा ने दिखाई 138 की रफ्तार

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कानपुर। कभी क्रिकेट खेलने के लिए जूते खरीदना भी मुश्किल था। महीने की सात हजार रुपये की नौकरी से घर और क्रिकेट, दोनों का खर्च निकालना पड़ता था।

जरूरत पड़ती तो पंक्चर की दुकान पर भी हाथ बंटाना पड़ता। लेकिन बाराबंकी के 23 वर्षीय शक्ति वर्मा ने तेज गेंदबाजी का सपना नहीं छोड़ा। आज वही शक्ति ग्रीन पार्क की पिच पर 138 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंक रहे हैं और आईपीएल के चर्चित खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा कर रहे हैं।

शक्ति की इस कहानी में यूपी टी-20 लीग का ‘स्पीड हंट’ उनके लिए बड़ा मोड़ बनकर आया। लखनऊ में हुए निशुल्क ट्रायल में उन्होंने 138 किमी प्रति घंटे की रफ्तार दर्ज कराई और सबसे तेज गेंदबाजों में अपनी जगह बनाई।

इसके बाद प्लेयर ऑक्शन में कानपुर सुपरस्टार्स ने उन्हें 2.50 लाख रुपये में खरीद लिया। 15 अगस्त को इकाना स्टेडियम में नोएडा किंग्स के खिलाफ उन्हें टी-20 लीग में पदार्पण का मौका मिला। अब कानपुर चरण में वह तीन मुकाबले खेल चुके हैं।

शक्ति के लिए सबसे बड़ी बात सिर्फ लीग में जगह बनाना नहीं, बल्कि उस दरवाजे तक पहुंचना है जो कभी उनके लिए बंद सा लगता था।

वह बताते हैं, “मैं सात हजार रुपये की प्राइवेट नौकरी करता था। ऐसे में सात हजार रुपये के क्रिकेट जूते कैसे खरीदता? शुरुआत में टेनिस बॉल से खेलता था। बल्लेबाजी करना चाहता था, लेकिन कोच सरवन नवाब ने मेरी गेंदबाजी को पहचाना और उस पर काम किया।”

उनके संघर्ष में परिवार के साथ कोच और साथी खिलाड़ियों का भी योगदान रहा। शक्ति के पिता अमर सिंह वर्मा स्थानीय मोटर मैकेनिक हैं। शक्ति ने बताया कि मुश्किल समय में उनके कोच सरवन नवाब और सीनियर खिलाड़ी विप्रज निगम व शिवम ने आर्थिक और नैतिक रूप से उनका साथ दिया।

‘स्पीड हंट’ के निशुल्क ट्रायल को शक्ति अपने जैसे खिलाड़ियों के लिए बड़ी उम्मीद मानते हैं। उन्होंने कहा, “समर्थ परिवार के लिए 1,500 रुपये की फीस शायद ज्यादा नहीं है, लेकिन सामान्य परिवार के लड़के के लिए 10 रुपये भी मायने रखते हैं। ट्रायल फ्री होने से हम जैसे ग्रामीण और गरीब खिलाड़ियों को मौका मिला।”

यूपी टी-20 लीग गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने भी शक्ति की कहानी को लीग की प्रतिभा खोज पहल की सफलता बताया।

उन्होंने कहा कि बिना फीस और सिफारिश के ऐसे खिलाड़ियों को मंच मिलना लीग की बड़ी उपलब्धि है। उनके मुताबिक शक्ति, शुभम और कृष्णा सरोज जैसे खिलाड़ी आगे चलकर आईपीएल और भारतीय टीम तक पहुंच सकते हैं।

ऑक्शन में मिले 2.50 लाख रुपये शक्ति के लिए सिर्फ एक रकम नहीं हैं। यह उस लड़के के लिए पहली बड़ी आर्थिक राहत है, जिसने अब तक क्रिकेट का खर्च जुटाने के लिए नौकरी और पंक्चर की दुकान तक का सहारा लिया।

शक्ति कहते हैं, “मैंने अपनी जिंदगी में एक साथ कभी इतने पैसे नहीं देखे थे। इस रकम का इस्तेमाल ट्रेनिंग और खुद को बेहतर बनाने में करूंगा।”

अब ग्रीन पार्क में हर तेज गेंद के साथ शक्ति के सामने एक नया लक्ष्य है। बाराबंकी के गांव से शुरू हुआ सफर यूपी टी-20 लीग तक पहुंच चुका है और उनकी नजर अब आईपीएल पर है। शक्ति का मानना है कि ‘स्पीड हंट’ जैसे मंच उन खिलाड़ियों के लिए उम्मीद बन सकते हैं, जिनके पास प्रतिभा तो है, लेकिन उसे दिखाने के लिए संसाधन नहीं।

बाराबंकी के ग्रामीण अंचल से निकलकर ग्रीन पार्क स्टेडियम तक पहुंचे शक्ति वर्मा ने UPCA, राजीव शुक्ला और डॉ. संजय कपूर का धन्यवाद करते हुए कहा कि स्पीड हंट ने उन खिलाड़ियों के लिए आईपीएल (IPL) और नेशनल टीम तक पहुँचने के रास्ते खोल दिए हैं, जो कभी संसाधनों के अभाव में अपना सपना छोड़ने पर मजबूर हो जाते थे।

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