लखनऊ: वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद–केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई), लखनऊ ने आज “शोधारंभ: प्रेरण समारोह” का आयोजन किया। कार्यक्रम में जनवरी 2026 एवं अगस्त 2026 बैच के 84 नवप्रवेशित पीएच.डी. शोधार्थियों का औपचारिक रूप से स्वागत किया गया।
जनवरी एवं अगस्त 2026 बैच के 84 नवप्रवेशित शोधार्थियों के लिए आयोजित प्रेरण कार्यक्रम में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और औषधि खोज में बहुविषयक दृष्टिकोण के महत्व पर जोर
इस कार्यक्रम ने शोधार्थियों की अकादमिक एवं अनुसंधान यात्रा के एक नए चरण का शुभारंभ किया तथा उन्हें सीएसआईआर-सीडीआरआई के अनुसंधान परिवेश एवं अकादमिक गतिविधियों से परिचित होने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जो ज्ञान के प्रकाश तथा शोधार्थियों की नई अकादमिक एवं वैज्ञानिक यात्रा के शुभारंभ का प्रतीक है। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक, संकाय सदस्य एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रितु त्रिवेदी के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने नवप्रवेशित शोधार्थियों का हार्दिक स्वागत करते हुए उन्हें संस्थान में उपलब्ध अकादमिक, वैज्ञानिक एवं अनुसंधान सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शोध कार्य में समर्पण, वैज्ञानिक जिज्ञासा एवं निरंतर प्रयास के महत्व पर जोर दिया।
डॉ. संजीव यादव ने ‘शोधारंभ’ प्रेरण कार्यक्रम का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया तथा इसके उद्देश्यों एवं नवप्रवेशित शोधार्थियों को सीएसआईआर-सीडीआरआई के अकादमिक एवं अनुसंधान परिवेश से परिचित कराने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न घटकों की जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्यक्रम शोधार्थियों को डॉक्टोरल अनुसंधान तथा वैज्ञानिक विकास के व्यापक परिप्रेक्ष्य से परिचित कराने के लिए तैयार किया गया है।
इस अवसर पर डॉ. दीपक दत्ता ने शोधार्थियों की अकादमिक यात्रा के प्रारंभिक चरण में प्रेरण कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि डॉक्टोरल अनुसंधान केवल विशेषज्ञता हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान नैतिकता, बहुविषयक दृष्टिकोण तथा जटिल वैज्ञानिक समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करने की प्रक्रिया भी है। उन्होंने आमंत्रित वक्ताओं का संक्षिप्त परिचय देते हुए उनके विशेषज्ञता के क्षेत्रों की जानकारी दी और वैज्ञानिक सत्रों की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. जिया आर. गायेन ने “फार्मेकोकाइनेटिक्स : ए की कम्पोनेंट ऑफ ड्रग डिस्कवरी एण्ड डेवेलपमेंट” विषय पर वैज्ञानिक व्याख्यान दिया। उन्होंने शरीर में औषधि अणुओं के व्यवहार को समझने में फार्माकोकाइनेटिक्स के महत्व तथा औषधि खोज एवं विकास के विभिन्न चरणों में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस सत्र के माध्यम से नवप्रवेशित शोधार्थियों को सुरक्षित एवं प्रभावी चिकित्सीय उम्मीदवारों के विकास में फार्माकोकाइनेटिक पहलुओं की भूमिका की जानकारी मिली।
इसके पश्चात डॉ. आमिर नाज़िर ने “ फ्राम मोलिक्युल टु मेडिसिन: रेगुलेटरी टोक्सिकोलोजी इन द ड्रग डिस्कवरी एण्ड डेवेलपमेंट जर्नी” विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने औषधि उम्मीदवारों की सुरक्षा प्रोफाइल के मूल्यांकन में रेगुलेटरी टॉक्सिकोलॉजी के महत्व तथा एक संभावित औषधि अणु से दवा तक की यात्रा में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने औषधि अनुसंधान एवं विकास में सुरक्षा मूल्यांकन तथा नियामक आवश्यकताओं के महत्व को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम में जनवरी एवं अगस्त 2026 बैच के 84 नवप्रवेशित शोधार्थियों का परिचय भी कराया गया। इस दौरान शोधार्थियों को एक-दूसरे से परिचित होने तथा संस्थान के वैज्ञानिक समुदाय के साथ संवाद एवं सहभागिता का अवसर मिला।
कार्यक्रम का समापन समूह छायाचित्र एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम के साथ हुआ। वृक्षारोपण गतिविधि शोधार्थियों की नई यात्रा के शुभारंभ का प्रतीक होने के साथ-साथ संस्थान की हरित पहल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
‘शोधारंभ: प्रेरण समारोह’ सीएसआईआर-सीडीआरआई की युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं के पोषण तथा उन्नत अनुसंधान एवं अकादमिक उत्कृष्टता के लिए सक्षम वातावरण उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
संस्थान संरचित अकादमिक कार्यक्रमों, वैज्ञानिक संवादों तथा बहुविषयक अनुसंधान के अवसरों के माध्यम से अनुसंधान, अकादमिक जगत तथा फार्मास्युटिकल एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों के लिए कुशल मानव संसाधन विकसित करने में निरंतर योगदान दे रहा है।
कार्यक्रम ने नवप्रवेशित शोधार्थियों को अपनी डॉक्टोरल यात्रा वैज्ञानिक जिज्ञासा, अनुसंधान की सत्यनिष्ठा, नवाचार तथा सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व की चुनौतियों के समाधान के प्रति प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।













