लखनऊ। औषधि, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय निगरानी, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि तथा औद्योगिक परीक्षण जैसे क्षेत्रों में मापन की शुद्धता, गुणवत्ता आश्वासन और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रमाणित संदर्भ सामग्री (सीआरएम) अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बढ़ती नियामक आवश्यकताओं और प्रयोगशालाओं के प्रत्यायन के विस्तार के साथ इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप), लखनऊ ने भारतीय निर्देशक द्रव्य (बीएनडी®) के रूप में स्वदेशी प्रमाणित संदर्भ सामग्रियों का विकास किया है।
ये सामग्री हर्बल फॉर्मुलेशन, औषधीय पौधों से प्राप्त उत्पादों, आयुष औषधियों और कार्यात्मक खाद्य पदार्थों के गुणवत्ता नियंत्रण, प्रमाणीकरण, मानकीकरण तथा नियामक अनुपालन में उपयोगी होंगी।
सीएसआईआर-सीमैप और सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के सहयोग से अब तक 22 स्वदेशी प्रमाणित संदर्भ सामग्रियों का विकास किया गया है।
इनमें पांच जनवरी 2026 को जारी 14 तथा 16 जून 2026 को जारी आठ अतिरिक्त सीआरएम शामिल हैं। इनका औपचारिक विमोचन सीएसआईआर के महानिदेशक एवं वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने सीएसआईआर मुख्यालय, नई दिल्ली में किया।
सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि स्वदेशी भारतीय निर्देशक द्रव्य (बीएनडी®) प्रमाणित संदर्भ सामग्रियों का विकास भारत की गुणवत्ता अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि ये संदर्भ सामग्री गुणवत्ता सुनिश्चित करने, नियामक मानकों का पालन करने तथा भारतीय हर्बल एवं आयुष उत्पादों की वैश्विक पहचान बढ़ाने में सहायक होंगी। साथ ही, यह पहल आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने में भी अहम योगदान देगी।
उन्होंने बताया कि इन स्वदेशी प्रमाणित संदर्भ सामग्रियों का उपयोग विधि सत्यापन, उपकरणों की जांच एवं अंशांकन, गुणवत्ता आश्वासन तथा नियामक मानकों के अनुपालन में किया जाएगा। इससे औषधि उद्योग, हर्बल एवं आयुष उत्पाद निर्माता, न्यूट्रास्यूटिकल कंपनियां, परीक्षण प्रयोगशालाएं, अनुसंधान संस्थान और शैक्षणिक संस्थान लाभान्वित होंगे।
फाइटोकेमिकल भारतीय निर्देशक द्रव्य (बीएनडी®) प्रमाणित संदर्भ सामग्रियों का यह विमोचन भारत की गुणवत्ता व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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इससे औषधीय पौधों पर आधारित उत्पादों की वैज्ञानिक गुणवत्ता और प्रामाणिकता मजबूत होगी तथा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और अनुरेखणीयता मानकों के अनुरूप भारतीय उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ेगी। साथ ही, आयातित संदर्भ सामग्रियों पर निर्भरता कम होने और भारतीय प्रयोगशालाओं के लिए उनकी उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
भारतीय निर्देशक द्रव्य (बीएनडी®) कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप है। मापन विज्ञान,
गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ बनाकर यह कार्यक्रम औषधि, आयुष, न्यूट्रास्यूटिकल तथा औषधीय पौधा आधारित उद्योगों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पारितंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।













