हाइलाइट्स
- कुड़िया घाट पर 12 से 21 जून तक चलेगा ‘रिवर योग 2026’ अभियान
- गोमती टास्क फोर्स, प्रादेशिक सेना, नगर निगम और बीबीएयू का संयुक्त आयोजन
- योग के साथ गोमती नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए जनजागरूकता पर जोर
लखनऊ। पिछले साल 60 दिवसीय रिवर योग अभियान की सफलता के बाद गोमती टास्क फोर्स, 137 कम्पोजिट इकोलॉजिकल टास्क फोर्स बटालियन (प्रादेशिक सेना) 39 गोरखा राइफल्स, लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) तथा बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के सहयोग से कुड़िया घाट पर फिर रिवर योग हो रहा है।
10 दिवसीय ‘रिवर योग 2026 अभियान का आयोजन इस बार 12 से 21 जून 2026 तक चलेगा। ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग, स्वस्थ गोमती के लिए योग’ थीम पर आधारित इस अभियान का उद्देश्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ना है।
दैनिक योग सत्रों और जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से गोमती नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण और सतत प्रबंधन के प्रति लोगों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय समुदायों को जोड़ने की पहल
कुड़िया घाट के प्राकृतिक और मनोहारी वातावरण में आयोजित इस अभियान में स्थानीय समुदायों, विद्यार्थियों, बच्चों, पर्यावरण प्रेमियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाया जा रहा है। इसके जरिए स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के प्रति सामूहिक संकल्प को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
‘नदी संरक्षण सामूहिक प्रयासों से ही संभव’
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. वेंकटेश दत्ता ने कहा कि नदियां जीवंत पारिस्थितिक तंत्र हैं और उनका संरक्षण सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि रिवर योग व्यक्तिगत स्वास्थ्य को पर्यावरणीय उत्तरदायित्व से जोड़ने वाली एक अभिनव पहल है, जो नागरिकों को गोमती नदी के पुनर्जीवन और उसके सतत प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करती है।
2025 के अभियान को मिला था व्यापक जनसमर्थन
गोमती टास्क फोर्स के मेजर कंवरदीप सिंह नेगी ने कहा कि वर्ष 2025 के 60 दिवसीय रिवर योग अभियान को लोगों का व्यापक समर्थन और उत्साह मिला था। उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए रिवर योग 2026 लोगों और नदी के बीच संबंध को और मजबूत बनाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि योग और जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से समाज को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा गोमती नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए सामूहिक रूप से आगे आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
समय के साथ रिवर योग एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है, जो मानव स्वास्थ्य और नदियों के स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करता है। यह पहल भारतीय सेना की सामुदायिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के प्रति सतत प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
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