अहमदाबाद : केमी ब्लेक का सपना एक कॉन्टॉर्शनिस्ट (शरीर को असाधारण रूप से मोड़ने वाली परफॉरमेंस आर्टिस्ट) बनने का था। अपने इस सपने को साकार करने के लिए वह न्यूयॉर्क से लास वेगास चली गईं और प्रतिष्ठित सर्क डू सोले (Cirque du Soleil) अकादमी में प्रशिक्षण लिया।
विश्व चैंपियनशिप की तैयारियों के दौरान अहमदाबाद स्थित साई सेंटर में प्रशिक्षण लेने वाली अमेरिकी जोड़ी ने अपने खेल और पेशेवर करियर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया था।
वहीं उनकी 16 वर्षीय बेटी किमानी ब्लेक ने जिम्नास्टिक सीखी और वह एक पेशेवर डांसर बनना चाहती हैं। मां और बेटी, दोनों को अपने सपनों का पीछा करने और रोजमर्रा की जिंदगी के दबावों के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने में योग ने नई दिशा दी।
इसी योग की बदौलत इस सप्ताह अहमदाबाद के ईकेए एरिना में दोनों ने इतिहास रच दिया। 35 वर्षीय केमी ने बैक बेंड व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि किमानी ने जूनियर आर्टिस्टिक व्यक्तिगत वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया।
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केमी ने कहा,“मैं कई वर्षों से योग का अभ्यास कर रही हूं, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यहां विश्व योगासन चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने आऊंगी। मुझे लगता था कि मैं भारतीय खिलाड़ियों के सामने मुकाबला करने के लिए पर्याप्त अच्छी नहीं हूं।
लेकिन रोमानिया की एक खिलाड़ी, जो मेरे इंस्टाग्राम पेज को फॉलो करती थीं, उन्होंने मुझे भाग लेने के लिए प्रेरित किया। भारत के कुछ कोचों ने भी मेरा उत्साह बढ़ाया। मुझे बेहद खुशी है कि मैं यहां स्वर्ण पदक जीत सकी।”
केमी का मानना है कि योग ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने कहा,“मैंने शुरुआत में अपनी प्रस्तुतियों के लिए लचीलापन बढ़ाने के उद्देश्य से योग शुरू किया था।
लेकिन जैसे-जैसे मैंने नियमित रूप से योग करना शुरू किया, इसने मुझे जीवन में उद्देश्य और स्थिरता दी। मैंने सही भोजन करना शुरू किया, जमीन पर सोने लगी और जीवन के प्रति मेरा नजरिया पूरी तरह बदल गया।”
केमी ने बाद में बिल्वा योगशाला से एक वर्ष का योग प्रमाणन पाठ्यक्रम पूरा किया और योग की बारीकियां सीखने के लिए एक महीने के लिए भारत भी आईं। इसके बाद उन्होंने हीलिंग और आत्म-अन्वेषण पर आधारित अपना स्वयं का कोचिंग कार्यक्रम तैयार किया।
जब केमी ने विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए भारत आने का फैसला किया, तो उनकी बेटी किमानी ने भी मां के पदचिह्नों पर चलने का निर्णय लिया। वह घर पर अकेले नहीं रहना चाहती थीं। मां-बेटी की इस जोड़ी के अलावा अमेरिका के छह अन्य योगासन खिलाड़ियों ने भी इस विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया।
किमानी ने कहा,“मैंने योग की बुनियादी बातें अपनी मां से सीखी थीं और नियमित रूप से अभ्यास भी करती थी, क्योंकि इससे मुझे मानसिक शांति मिलती है। लेकिन विश्व चैंपियनशिप के लिए मैंने गंभीरता से केवल तीन सप्ताह पहले प्रशिक्षण शुरू किया था। मुझे बेहद खुशी है कि मैं यहां कांस्य पदक जीतने में सफल रही।”
प्रतियोगिता से कुछ सप्ताह पहले ही केमी और किमानी भारत पहुंच गई थीं ताकि स्थानीय कोचों के साथ अभ्यास कर सकें। केमी का कहना है कि यहां उन्हें जो अपनापन और सहयोग मिला, उसने इस पूरे अनुभव को और भी खास बना दिया।
उन्होंने कहा,“जब हम भारत पहुंचे तो हमारा सामान समय पर नहीं पहुंचा था। लेकिन यहां साई सेंटर में प्रशिक्षण ले रही भारतीय टीम ने हमारा गर्मजोशी से स्वागत किया और हमें कई चीजें भी सिखाईं।
यहां तक कि मुकाबले से पहले जब मैं वार्म-अप कर रही थी, तब एक भारतीय खिलाड़ी ने मेरी कुछ गलतियों की ओर ध्यान दिलाया, जिससे मुझे काफी मदद मिली।”
केमी ने उम्मीद जताई कि भविष्य में योगासन को ओलंपिक खेलों में भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा,“दुनिया भर में बहुत से लोग योग का अभ्यास करते हैं, लेकिन एक खेल के रूप में योगासन बिल्कुल अलग है।
इसमें जिस एकाग्रता, सटीकता और अनुशासन की आवश्यकता होती है, वह केवल स्वास्थ्य और कल्याण के लिए किए जाने वाले योग से काफी अलग है। मैं योगासन को ओलंपिक तक पहुंचाने के लिए जो भी भूमिका निभानी पड़े, निभाने के लिए तैयार हूं।”
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