नई दिल्ली : 138 वर्षों की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाते हुए डूरंड कप अपने ऐतिहासिक 135वें संस्करण के साथ 25 जुलाई से 23 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट में दो विदेशी टीमों सहित कुल 24 टीमें लेंगी हिस्सा
एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट और दुनिया की तीसरी सबसे पुरानी लगातार आयोजित होने वाली फुटबॉल प्रतियोगिता इस बार भी दो विदेशी टीमों सहित कुल 24 टीमों को एक मंच पर लाएगी। पांच मेज़बान शहरों में आयोजित होने वाला यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट भारतीय फुटबॉल में अपनी ऐतिहासिक और अहमपहचान को एक बार फिर मजबूत करेगा।
कोलकाता, रांची, गुवाहाटी, इम्फाल और शिलांग के छह स्टेडियमों में खेले जाएंगे मुकाबले
पिछले कुछ वर्षों में इंडियन ऑयल डूरंड कप ने उल्लेखनीय विस्तार किया है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने के साथ-साथ इसने देश के शीर्ष क्लबों, सर्विसेज़ टीमों और उभरती फुटबॉल प्रतिभाओं को एक साथ लाने वाले प्रमुख मंच के रूप में अपनी प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया है।
रांची पहली बार डूरंड कप की मेज़बानी करेगा
इस वर्ष टूर्नामेंट का आयोजन कोलकाता, रांची, गुवाहाटी, इम्फाल और शिलांग में होगा, जिसमें रांची पहली बार डूरंडकप के मेज़बान शहर के रूप में शामिल होगा। मुकाबले कुल छह स्टेडियमों में खेले जाएंगे। कोलकाता में विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन और किशोर भारती क्रीड़ांगन मेज़बानी करेंगे, जबकि रांची का बिरसामुंडास्टेडियम, गुवाहाटी का इंदिरा गांधी एथलेटिक स्टेडियम, इम्फाल का खुमानलंपाक स्टेडियम और शिलांग का जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम अन्य मेज़बान स्थल होंगे।
भारतीय फुटबॉल की विरासत को आगे बढ़ाता डूरंड कप
अपने 135वें संस्करण में प्रवेश कर रहा डूरंड कप दुनिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंटों में से एक होने के साथ-साथ भारतीय फुटबॉल में आज भी एक विशेष स्थान रखता है। कई पीढ़ियों से यह प्रतियोगिता युवा खिलाड़ियों के लिए देश की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ अपनी प्रतिभा साबित करने और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का मंच रही है।

इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि इसने देश के हर कोने से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अवसर प्रदान किए। सर्विसेज़ टीमों, पारंपरिक क्लबों, उभरती अकादमियों और राज्य स्तरीय टीमों के लिए डूरंड कप आज भी भारतीय फुटबॉल में अपनी पहचान बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
इंडियन ऑयल डूरंड कप की सबसे बड़ी ताकत हमेशा भारतीय फुटबॉल के विविध स्वरूप को एक मंच पर लाना रही है। यह प्रतियोगिता केवल देश के शीर्ष क्लबों को ही नहीं, बल्कि उभरते हुए क्लबों और युवा खिलाड़ियों को भी मजबूत विपक्ष के खिलाफ खेलने, अनुभव हासिल करने और अपने खेल को निखारने का अवसर देती है।
शीर्ष स्तर की प्रतिस्पर्धा और नई प्रतिभाओं को अवसर देने का यही संतुलन पिछले एक शताब्दी से अधिक समय से इस टूर्नामेंट की पहचान रहा है और आज भी इसकी सबसे विशिष्ट विशेषताओं में शामिल है।
2019 में पूर्वी भारत में स्थानांतरित होने के बाद से डूरंड कप ने खुद को देश की प्रमुख फुटबॉल प्रतियोगिताओं में फिर से स्थापित किया है। 16 टीमों से शुरू हुई प्रतियोगिता अब 24 टीमों तक विस्तार कर चुकी है। भारतीय सेना की ईस्टर्नकमांड द्वारा तीनों सेनाओं की ओर से आयोजित यह टूर्नामेंट अपनी तरह का अनूठा आयोजन है, जहां सर्विसेज़ टीमें और भारत के प्रमुख फुटबॉल क्लब एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं।
हाल के वर्षों में इस प्रतियोगिता में पड़ोसी देशों की सेना की टीमों सहित विदेशी टीमों की भागीदारी भी देखने को मिली है। इस बार भी दो विदेशी टीमों सहित कुल 24 टीमें टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी, जिससे भारतीय क्लबों, सर्विसेज़ टीमों और अंतरराष्ट्रीय टीमों के बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। भाग लेने वाली टीमों, ग्रुपों, मैच कार्यक्रम और नॉकआउट चरण की विस्तृत जानकारी जल्द घोषित की जाएगी।
टूर्नामेंट का समापन 23 अगस्त 2026 को होगा, जब विजेता टीम प्रतिष्ठित डूरंड कप ट्रॉफी अपने नाम करेगी और भारतीय फुटबॉल के एक गौरवशाली इतिहास का हिस्सा बनेगी। नॉर्थ ईस्ट यूनाइटेड एफसी मौजूदा चैंपियन है।











