प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। पीएम की पहल पर उनके आधिकारिक काफिले को अब छोटा कर दिया गया है।
उन्होंने अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप को यह निर्देश दिया है कि उनके काफिले में शामिल कारों की संख्या को 50 प्रतिशत तक कम करने का प्रयास किया जाए। उनके इस कदम को सरकार के बाकी विभागों और मंत्रियों के लिए भी एक बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने यह भी इच्छा जताई है कि उनके सुरक्षा बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि इसके लिए कोई भी नई गाड़ी नहीं खरीदी जाएगी, ताकि किसी भी तरह के अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके।
एसपीजी ने पीएम के इन निर्देशों पर अमल करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि सुरक्षा से जुड़े ‘ब्लू बुक’ के अनिवार्य दिशानिर्देशों के साथ कोई समझौता न हो। सूत्रों ने बताया कि हाल ही में दिल्ली से बाहर पीएम मोदी के दौरों में उनका काफिला पहले की तुलना में छोटा नजर आया है।
पीएम मोदी ने यह पहल ऐसे समय में की है, जब रविवार को अपने हैदराबाद दौरे पर उन्होंने आम लोगों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील की थी। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री का खुद आगे आकर ऐसा करना पूरी सरकार के लिए एक इशारा है कि वे भी जल्द से जल्द इस दिशा में काम करें।
संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सरकारी मंत्रालयों और विभागों में भी खर्चे कम करने के लिए कई कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत कुछ प्रमुख बदलाव हो सकते हैं:
- कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा मेट्रो का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- आने-जाने के लिए कारपूलिंग का विकल्प चुनने पर जोर दिया जाएगा।
- मंत्रालयों में होने वाले बड़े और खर्चीले भोज के आयोजनों से बचा जाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि सभी विभागों में उन कदमों को लेकर चर्चा जारी है जिनसे ईंधन की खपत कम की जा सके। पीएम का संदेश हमारे सहित सभी के लिए है। हम कार्मिक विभाग के आधिकारिक पत्र का इंतजार कर रहे हैं कि हमें क्या करना चाहिए। हालांकि, हर विभाग को अपनी-अपनी योजना खुद बनानी होगी।
बता दें कि सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह की बैठक हुई थी। इस बैठक में भी गैर-जरूरी यात्राओं में कटौती करके ईंधन का उपयोग कम करने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है।
पश्चिम एशिया में मचे हाहाकर (ईरान युद्ध) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, शिपिंग बाधित हुई है तथा एलपीजी गैस की सप्लाई में दबाव और पैनिक बाइंग देखी गई, जिससे मार्च 2026 में स्थानीय स्तर पर कतारें और चिंता बढ़ी।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और कच्चे तेल का पर्याप्त स्टॉक है। यानी 60 दिनों के आसपास का स्टॉक उपलब्ध है, रिफाइनरियां सामान्य चल रही हैं तथा कोई राशनिंग या कमी नहीं है।
पीएम मोदी ने ईंधन बचत, वर्क-फ्रॉम-होम, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सावधानी बरतने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा का संरक्षण हो और आयात बिल पर बोझ कम पड़े; सरकार ने टैक्स कटौती, 41 देशों से आयात विविधीकरण और रूस से बढ़े आयात जैसे कदम उठाए हैं। कुल मिलाकर, तत्काल संकट टला हुआ है लेकिन कीमतों पर दबाव और सतर्कता बनी हुई है।













