श्रद्धा कपूर को पिछली बार 2024 में हिट फिल्म ‘स्त्री 2: सरकटे का आतंक’ में देखा गया था, फैंस उनकी अगली फिल्म ‘ईथा’ के बारे में अपडेट का इंतजार कर रहे थे। इस बायोपिक की शूटिंग के बारे में बीच-बीच में अपडेट आते रहते थे, लेकिन कोई पक्की जानकारी नहीं थी।
फिल्म मेकर्स ने आखिरकार घोषणा कर दी है कि यह फिल्म इसी साल रिलीज़ होगी। उन्होंने अपनी घोषणा में लिखा है कि प्रोड्यूसर दिनेश विजान और डायरेक्टर लक्ष्मण उतेकर, 2025 में ‘छावा’ के बाद, ‘ईथा’ के लिए फिर से साथ आ रहे हैं। यह एक ‘बोल्ड और इमोशनल फिल्म’ है जिसमें श्रद्धा कपूर एक दमदार और अहम भूमिका में नजर आएंगी।
फिल्म में श्रद्धा के अलावा रणदीप हुड्डा और मोहम्मद जीशान अय्यूब भी अहम भूमिकाओं में होंगे। श्रद्धा लोक कलाकार विठाबाई का किरदार निभाएंगी। फिल्म की रिलीज डेट अनाउंस हो चुकी है, और यह फिल्म 28 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है और इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी है।
#Xclusiv… DINESH VIJAN – LAXMAN UTEKAR REUNITE: SHRADDHA KAPOOR STARS IN 'EETHA' – RELEASE DATE LOCKED… Following the blockbuster success of #Chhaava, Dinesh Vijan and Laxman Utekar reunite for #Eetha – a bold and emotionally charged film that features #ShraddhaKapoor in a… pic.twitter.com/QkxnglsP0d
— taran adarsh (@taran_adarsh) June 8, 2026
‘ईथा’ महाराष्ट्र की मशहूर तमाशा और लावणी कलाकार विठाबाई भाऊ मांग नारायणगांवकर की जिंदगी पर आधारित है। इसकी कहानी 1940 के दशक से लेकर 1990 के दशक तक फैली होगी, जिसमें उनके मशहूर होने का सफर और उनके संघर्ष दिखाए जाएंगे।
श्रद्धा की पिछली फिल्म ‘स्त्री 2’ जबरदस्त हिट रही थी। राजकुमार राव, अभिषेक बनर्जी और पंकज त्रिपाठी के साथ बनी यह फिल्म हिंदी फिल्मों में अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई। इसमें अक्षय कुमार का कैमियो भी था। ईथा के अलावा श्रद्धा की पाइपलाइन में नागिन, स्त्री 3 जैसी फिल्में भी हैं।
विठाबाई का जन्म जुलाई 1935 में सोलापुर जिले के पंढरपुर में हुआ था। वह ऐसे परिवार से थीं जहां पारंपरिक लोक गीत गाने की मजबूत परंपरा थी। उन्होंने कम उम्र में ही अपना करियर शुरू किया और बाद में तमाशा और लावणी थिएटर की दुनिया में मशहूर हो गईं।
वह मंच पर अपनी जबरदस्त मौजूदगी, भावपूर्ण आवाज और जोश भरी परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती थीं। भारतीय लोक संस्कृति में योगदान के लिए विठाबाई को 1957 और 1990 में दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार मिला।
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