सीएसआईआर-सीमैप ने मनाया 48वाँ वार्षिक दिवस

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लखनऊ : सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप), लखनऊ ने आज अपने परिसर में 48वाँ वार्षिक दिवस उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया।

“हमारा विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहे। यह किसानों, गाँवों और उद्योगों तक पहुँचे तथा अंततः समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए”: पद्मश्री प्रो. अनिल कुमार गुप्ता

यह आयोजन सीएसआईआर के 85वें स्थापना वर्ष के महत्वपूर्ण अवसर पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री प्रो. अनिल कुमार गुप्ता मुख्य अतिथि, डॉ. शंकरनारायणन राजन, उत्कृष्ट वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीसीएमबी, हैदराबाद विशिष्ट अतिथि तथा हेमंत पाटिल, माननीय राज्यमंत्री (कैबिनेट रैंक), महाराष्ट्र सरकार विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने मुख्य अतिथि एवं सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया तथा संस्थान की पिछले एक वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों और प्रगति से अवगत कराया।

मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. अनिल कुमार गुप्ता ने सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं शोधार्थियों को वार्षिक दिवस की बधाई दी तथा उच्च प्रभाव वाली उत्कृष्ट शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा, “ जहाँ भी कोई पौधा उगाया जाता है, वहाँ उसके मूल्य संवर्धन का अवसर होना चाहिए। ” उन्होंने किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और स्थानीय समुदायों को साथ जोड़कर नेटवर्क एवं क्लस्टर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक ज्ञान से विकसित उत्पादों में वैज्ञानिकों के साथ-साथ किसानों, स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान के मूल धारकों को भी उचित मान्यता दी जानी चाहिए।

इस अवसर पर सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने संस्थान की पिछले वर्ष की प्रमुख शोध उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि सीमैप के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में विकसित शोध को देशभर के किसानों, विशेषकर दूरदराज एवं जनजातीय क्षेत्रों के किसानों तक पहुँचाने के लिए क्षेत्र-स्तरीय प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए हैं, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ जमीनी स्तर तक पहुँच रहा है।

सीएसआईआर-सीमैप का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि सीएसआईआर एरोमा मिशन के अंतर्गत विभिन्न सीएसआईआर प्रयोगशालाओं ने मिलकर उन्नत किस्मों एवं प्रौद्योगिकियों को देशभर के किसानों, उद्योगों और उद्यमियों तक पहुँचाया है।

इस मिशन ने अनेक महत्वपूर्ण सगंध फसलों की खेती, प्रसंस्करण एवं विपणन को नई दिशा दी है। इस मिशन को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार–विज्ञान टीम 2025 (कृषि) से सम्मानित किया गया, जबकि संस्थान को सतत कृषि एवं किसान-केंद्रित प्रौद्योगिकियों में योगदान के लिए FICCI सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया।

फाइटो-फार्मास्युटिकल मिशन के अंतर्गत सीएसआईआर-सीमैप ने 14 बीएनडी संदर्भ सामग्री विकसित की तथा औषधीय एवं सगंध पौधों की छह नई किस्में जारी कीं।

इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसी संदर्भ सामग्रियों के उत्पादन की स्वदेशी क्षमता विकसित की गई है, जिससे आयात पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।

संस्थान ने गत अवधि (2025–26) के दौरान 16 हर्बल फॉर्मुलेशन प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण किया, 6 पेटेंट दाखिल किए तथा 23 संस्थागत एवं औद्योगिक समझौते किए। ये उपलब्धियाँ नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सामाजिक प्रभाव के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

विशेष अतिथि हेमंत पाटिल, माननीय राज्यमंत्री (कैबिनेट रैंक), महाराष्ट्र सरकार ने संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि हल्दी के क्षेत्र में यह साझेदारी महाराष्ट्र की जीआई-टैग प्राप्त “वासमत हल्दी” को खेतों से वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा विज्ञान आधारित मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय को मजबूत करेगी।

48वें सीएसआईआर-सीमैप वार्षिक दिवस समारोह के अंतर्गत डॉ. शंकरनारायणन राजन, उत्कृष्ट वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीसीएमबी , हैदराबाद ने “ प्रोटीन जैवसंश्लेषण में काइरल चेकपॉइंट्स: पादप विकास से एक अप्रत्याशित संबंध ” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान दिया।

वार्षिक दिवस के अवसर पर माननीय बालासाहेब ठाकरे हरिद्रा (हल्दी) अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इसके माध्यम से संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, जर्मप्लाज्म संरक्षण, फाइटोकेमिकल प्रोफाइलिंग, मूल्य संवर्धन और किसान प्रशिक्षण के माध्यम से जीआई-टैग प्राप्त “वासमत हल्दी” को बढ़ावा देने एवं बड़े स्तर पर विस्तार करने का प्रयास किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, डीयूवीएएसयू, मथुरा, उत्तर प्रदेश के साथ औषधीय एवं सगंध पौधों (MAPs) के पशु चिकित्सा एवं कुक्कुट प्रबंधन के उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान एवं अन्वेषण के लिए एक समझौता ज्ञापन किया गया।

गुजरात ग्रासरूट्स इनोवेशन ऑगमेंटेशन नेटवर्क (GIAN), अहमदाबाद के साथ भी समझौता ज्ञापन किया गया, जिसके अंतर्गत हिमालयी एवं जनजातीय पारंपरिक ज्ञान का प्रमाणीकरण तथा बारामूला, गुरेज और पश्चिम सिक्किम में सामुदायिक सूक्ष्म उद्यमों, उत्पाद विकास और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसके साथ ही, किसानों एवं कृषि समुदायों के लिए कार्बन क्रेडिट एवं ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रमों के क्रियान्वयन हेतु कम्प्लायंस कार्ट प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा के साथ सहयोग एवं कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

कार्यक्रम का समापन डॉ. रमेश श्रीवास्तव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन तथा राष्ट्रगान के साथ हुआ। समारोह में वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, संकाय सदस्यों, शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संस्थानों के प्रतिनिधियों, आमंत्रित गणमान्य अतिथियों तथा सीएसआईआर-सीमैप के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।

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