लखनऊ : अंजुमन मासूमिया हुसैनिया की सालाना दो दिवसीय शब्बेदारी का समापन अलविदाई अलम के साथ हुआ। मुहर्रम की 27 सफर को अलविदाई अलम जनाब ज़ैग़म साहब के अज़ाख़ाने से उठकर कर्बला दयानात-उद-दौला पहुंचा। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके अज़ीम कुर्बानी को याद किया।
अलविदाई मजलिस को मशहूर मर्सियाख़्वान जनाब खुर्शीद साहब ने खिताब फरमाया। उन्होंने करबला के शहीदों की कुर्बानियों और उनके पैगाम को याद करते हुए अकीदतमंदों को संबोधित किया।
अंजुमन मासूमिया हुसैनिया के सेक्रेटरी जनाब ताज अब्बास ने बताया कि दो दिनों तक चली इस सालाना शब्बेदारी में लखनऊ की 18 अंजुमनों ने शिरकत की। विभिन्न अंजुमनों ने सलाम और नौहाख़्वानी के जरिए बीबी फातिमा ज़हरा (स.अ.) को उनके लाल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) का पुरसा पेश किया।
उन्होंने कहा कि शब्बेदारी का उद्देश्य करबला के पैगाम, इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी और उनके बताए हुए रास्ते को याद करना है। कार्यक्रम के दौरान अकीदतमंदों ने पूरी अकीदत और एहतराम के साथ नौहाख़्वानी और मातम में हिस्सा लिया।
दो दिवसीय शब्बेदारी के समापन पर अंजुमनों और अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए करबला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया तथा अमन, भाईचारे और इंसानियत के पैगाम को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
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