भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर), पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज (PAS) और पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज (PASS), वेटिकन सिटी के साथ साझेदारी में, 3–4 नवंबर 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘जलवायु समिट एवं अनुकूलन के लिए पुनर्योजी कृषि, जल और ऊर्जा पर ग्रामीण भारत क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन’ का आयोजन करेगा।
आईआईटी कानपुर में कोटक महिंद्रा बैंक के सहयोग से स्थापित कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी (KSS) के माध्यम से आयोजित यह शिखर सम्मेलन, विशेष रूप से गंगा के मैदानी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने, कृषि की स्थिरता सुनिश्चित करने और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने के लिए विज्ञान एवं नीति-आधारित उपायों पर चर्चा करेगा।
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री, शिवराज सिंह चौहान, इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि होंगे।यह शिखर सम्मेलन ग्रामीण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर आयोजित हो रहा है, जब बढ़ते तापमान, मानसून की अनिश्चितता, भूजल पर बढ़ता दबाव, मृदा क्षरण और, जल, ऊर्जा, जनस्वास्थ्य और आजीविका पर एक-दूसरे से जुड़ा दबाव बढ़ा रही हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों तक सीमित समाधानों से आगे बढ़कर ऐसे समेकित दृष्टिकोण विकसित करना है, जो मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण एवं प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु-अनुकूल कृषि और सुदृढ़ ग्रामीण समुदायों को परस्पर जोड़ें।
यह शिखर सम्मेलन PAS और PASS की अंतरराष्ट्रीय जलवायु-अनुकूलन पहल का हिस्सा है, जो MAST रूपरेखा—शमन (Mitigation), अनुकूलन (Adaptation) और सामाजिक रूपांतरण (Societal Transformation)—पर आधारित है।
वर्ष 2024 में वेटिकन में आयोजित PAS–PASS वैश्विक जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन के बाद, इस पहल के अंतर्गत अमेरिका के कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स, नैरोबी, वियना, ब्रासीलिया और डकार सहित विभिन्न स्थानों पर क्षेत्रीय संवाद आयोजित किए गए हैं।
भारत में आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन इस वैश्विक रूपरेखा को ग्रामीण भारत और गंगा के मैदानी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों के संदर्भ में आगे बढ़ाएगा। सम्मेलन का एक प्रमुख विषय पुनर्योजी कृषि होगा, जिसे जलवायु अनुकूलन से आगे बढ़कर पारिस्थितिक पुनर्बहाली के एक प्रभावी माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जल धारण क्षमता और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना, जैव विविधता का समावेश, संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी जैसे पहलुओं पर चर्चा होगी।
सम्मेलन में यह भी विचार किया जाएगा कि मृदा विज्ञान, जल विज्ञान, सटीक कृषि, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल निगरानी के क्षेत्र में हुई प्रगति को किस प्रकार व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने वाले कृषि एवं जलवायु समाधानों में बदला जा सकता है। दो दिवसीय कार्यक्रम में भारत और दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, क्षेत्रीय कार्यकर्ता और नवप्रवर्तक भाग लेंगे।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के साथ PAS के अध्यक्ष प्रो. जोआचिमवॉनब्राउन; आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्रअग्रवाल; भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के अध्यक्ष प्रो. शेखर मांडे; और आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रो. सच्चिदानंदत्रिपाठीशामिल होंगे। एक विशेष सत्र में पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पद्म श्री से सम्मानित प्रो. अशोक गुलाटी और ‘जल पुरुष’ के नाम से प्रसिद्ध रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजेंद्र सिंह अपने विचार साझा करेंगे।
सम्मेलन में ‘MAST – जलवायु अनुकूलन के लिए एक सार्वभौमिक रूपरेखा’ विषय पर भी चर्चा होगी, जिसमें PAS की परिषद के सदस्य प्रो. वीरभद्रन रामनाथन और मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय, बोस्टन के चांसलर सहितPASS की परिषद के सदस्य प्रो. मार्सेलसुआरेज़-ओरोज़्कोवीडियो संदेशों के माध्यम से योगदान देंगे।













