युवाओं के रोजगार के लिए बने ‘जॉब्स एंड स्किल्स मिशन’ : डॉ. राजेश्वर सिंह

0
65

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने युवाओं के रोजगार और रोजगारपरक कौशल को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री को पत्र भेजकर सरकार, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच समन्वय पर आधारित एकीकृत ‘जॉब्स एंड स्किल्स मिशन’ शुरू करने का सुझाव दिया है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार के लिए तैयार करने के बजाय उद्योगों को भी प्रतिभा निर्माण, प्रशिक्षण और कौशल विकास की जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके लिए रोजगार मेले, उद्योग आधारित प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और लगातार कौशल उन्नयन को एक साझा व्यवस्था से जोड़े जाने की जरूरत है।

डॉ. सिंह ने प्रस्ताव दिया कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में अगले छह माह तक प्रत्येक माह एक निर्धारित दिन, अधिमानतः रविवार को, रोजगार एवं कौशल मेले आयोजित किए जाएं।

इन छह महीनों की तिथियां पहले से घोषित हों और इन मेलों में सत्यापित कंपनियां अपनी वास्तविक रिक्तियों के साथ शामिल हों।

कंपनियों को वॉक-इन इंटरव्यू और जहां संभव हो, मौके पर ही चयन की व्यवस्था करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस मॉडल से मिलने वाले परिणामों के आधार पर इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू किया जा सकता है।

उद्योग केवल प्रतिभा भर्ती न करे, प्रतिभा तैयार भी करे

विधायक ने कहा कि उद्योग की भूमिका केवल तैयार प्रतिभाओं को नियुक्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। युवाओं को प्रशिक्षण देना, अप्रेंटिसशिप उपलब्ध कराना, रोजगार देना तथा उन्हें अपस्किल और रिस्किल करना भी उद्योग जगत की राष्ट्रीय जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनियों के सीईओ और प्रमोटर फ्रेशर हायरिंग तथा अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करें और युवा प्रशिक्षण एवं प्रतिभा निर्माण को कंपनियों के बोर्डरूम स्तर के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) में शामिल किया जाए।

उनका कहना है कि उद्योगों को केवल उपलब्ध प्रतिभा का उपयोग करने के बजाय नई प्रतिभा तैयार करने पर भी ध्यान देना चाहिए। डॉ. सिंह ने विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में अपस्किलिंग एवं रिस्किलिंग सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया।

विश्वविद्यालयों को बनाया जाए आजीवन कौशल विकास का केंद्र

इन केंद्रों के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में तीन, छह और 12 माह के उद्योग आधारित मॉड्यूलर पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं।

उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों के निर्माण और समय-समय पर उनमें बदलाव करने में उद्योगों की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए, ताकि प्रशिक्षण सीधे रोजगार की जरूरतों से जुड़ा रहे। उनका जोर इस सोच पर है कि युवाओं की शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहे, बल्कि वे जीवनभर नए कौशल सीखते रहें।

तीन से पांच साल की रोजगार जरूरतों की पहले से हो पहचान

डॉ. राजेश्वर सिंह ने केंद्र और राज्य स्तर पर उद्योग जगत के प्रमुखों, सीईओ, विश्वविद्यालयों और कौशल विकास संस्थानों के साथ नियमित ‘जॉब्स एंड स्किल्स राउंडटेबल’ आयोजित करने का सुझाव भी दिया। इसके माध्यम से अगले तीन से पांच वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक मानव संसाधन और कौशल की जरूरतों का आकलन पहले से किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि रोजगार मेलों के दौरान उपलब्ध रिक्तियों, आवेदकों, चयनित अभ्यर्थियों, वास्तविक ज्वाइनिंग और सामने आए कौशल अंतर का डेटा एकत्र किया जाना चाहिए। इसके आधार पर जिलावार रोजगार एवं कौशल मानचित्र तैयार हो, जिससे यह पता चल सके कि किस जिले में किन क्षेत्रों के लिए किस प्रकार के कौशल की आवश्यकता है।

ये भी पढ़ें : फोरेंसिक विज्ञान न्याय व्यवस्था की रीढ़, विद्यार्थी बनें ‘सत्य के प्रहरी’: डॉ. राजेश्वर सिंह

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिन युवाओं का किसी रोजगार मेले में चयन नहीं हो पाता, उन्हें केवल असफल मानकर छोड़ने के बजाय उनके कौशल का आकलन कर ब्रिज कोर्स, अप्रेंटिसशिप और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, ताकि वे अगले अवसर के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।

भर्ती में तकनीक के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी जरूरी

डॉ. सिंह ने उद्योग जगत से भर्ती प्रक्रिया को अधिक मानवीय और संभावनाओं पर आधारित बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हर आवेदक केवल सीवी, स्कोर या एप्लीकेशन नंबर नहीं है। वह किसी का बेटा या बेटी है और उसके पीछे एक परिवार की वर्षों की मेहनत, त्याग और उम्मीदें हैं।”

उन्होंने कहा कि केवल कौशल की कमी के आधार पर युवाओं को तुरंत खारिज करने के बजाय उनकी सीखने की क्षमता और संभावनाओं को भी देखा जाना चाहिए। जहां आवश्यक हो, उन्हें प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देकर दूसरा अवसर दिया जाए। उन्होंने उद्योगों से ‘ट्रेन बिफोर यू रिजेक्ट’ की भावना के साथ काम करने का आग्रह किया।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरकार की व्यापक पहुंच, अकादमिक जगत का ज्ञान और उद्योग जगत का नेतृत्व, जिम्मेदारी तथा मानवीय दृष्टिकोण मिलकर भारत के

जनसांख्यिकीय लाभांश को वास्तविक रोजगार लाभांश में बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसा तंत्र तैयार करना होना चाहिए, जिसमें हर युवा को अवसर मिले, हर कौशल अंतर को प्रशिक्षण से दूर किया जाए, हर प्रतिभा को पहचाना जाए और हर कौशल को रोजगार से जोड़ा जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here