डूरंड कप में ब्राजीलियन जादू, रोड्रिगिन्हो ने पांच गोल से मचाई सनसनी

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Durand CUP 2026

रांची: ब्राज़ील में फुटबॉल को सिर्फ जीतने के इरादे से नहीं, बल्कि आत्मा के साथ खेलने के लिए एक शब्द है—जोगाबोनितो, यानी सुंदर फुटबॉल। यह सिर्फ विश्वकप फाइनल या कोपाकबाना के समुद्र तट पर खेले जाने वाले खेल के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द नहीं है।

यह एक दर्शन है, जो खिलाड़ियों के भीतर उसी दिन से बसना शुरू हो जाता है, जब वे पहली बार किसी टूटी-फूटी कंक्रीट की सतह पर गेंद को छूते हैं। वहां खेल छोटे होते हैं, जगह बेहद कम होती है और कौशल दिखाना कोई सजावट नहीं, बल्कि अस्तित्व की जरूरत होता है।

शुक्रवार की रात रांची में एससी दिल्ली के समर्थकों को इस दर्शन की एक झलक देखने को मिली और उसे दिखाने वाला खिलाड़ी था एक ऐसा ब्राज़ीलियाई फॉरवर्ड, जिसके बारे में मैच शुरू होने से पहले शायद ही किसी ने सुना था।

13वें मिनट तक रोड्रिगिन्हो हैट्रिक पूरी कर चुके थे। क्लब के लिए अपनी पहली शुरुआत में। उस जर्सी में, जिसे पहनने का मौका भी उन्हें मुश्किल से मिला था। लेकिन उनका काम अभी पूरा नहीं हुआ था। मैच खत्म होने से पहले उन्होंने दो और गोल दागे। इनमें से एक गोल पेनाल्टी बॉक्स के बाहर से लगाया गया शानदार कर्लिंग शॉट था, जो हवा में मुड़ता हुआ गोलकीपर को पूरी तरह छकाकर जाल में जा समाया, मानो वह किसी पटकथा का हिस्सा हो।

अंतिम सीटी बजने तक एससीदिल्ली ने डिफेंडर्स एफसी को 7-0 से हरा दिया था और उनमें से पांच गोल उसी खिलाड़ी के नाम थे, जिसका नाम शायद स्कोरबोर्ड संभालने वाले को भी दो बार जांचना पड़ा होगा। लेकिन जबरोड्रिगिन्हो से इस प्रदर्शन के बारे में पूछा गया, तो मैदान पर दिखा आत्मविश्वास कहीं गायब था। उसकी जगह एक शांत और संतुलित खिलाड़ी सामने आया।

उन्होंने कहा, “यह पूरे टीम पर सभी के भरोसे का नतीजा है। मैं पूरे कोचिंग स्टाफ का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे सिखाया और हर कदम पर मेरा साथ दिया।” कुछ मंचों का अपना अलग महत्व होता है और डूरंड कप उन्हीं में से एक है।

1888 में शिमला की पहाड़ियों में शुरू हुआ यह टूर्नामेंट एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है। इसने दो विश्वयुद्ध देखे हैं, एक नए राष्ट्र का जन्म देखा है और एक सदी से अधिक समय तक फुटबॉल को बदलते हुए भी खुद को जीवित रखा है।

इसके इतिहास में कई यादगार कहानियां दर्ज हैं—मोहम्मडन स्पोर्टिंग पहला नागरिक क्लब बना जिसने यह ट्रॉफी जीती, और फिर एक किशोर बाइचुंग भूटिया का वह साइकिल किक, जिसकी चर्चा भारतीय फुटबॉल आज भी करता है। अब उसी इतिहास में रोड्रिगिन्हो का नाम भी दर्ज हो चुका है।

उनका पहला गोल शुद्ध कौशल का नमूना था। गेंद को सीने से नियंत्रित करना, एक तेज़ घूमकर अपने डिफेंडर को पीछे छोड़ देना और फिर बाएं पैर से गेंद को निचले कोने में बेहद सधे हुए अंदाज़ में पहुंचा देना। दूसरा गोल महज़ एक मिनट बाद आया, जब उन्होंने रक्षापंक्ति को चीरती हुई थ्रूबॉल पर पहली हीटच में शानदार फिनिश किया।तीसरा गोल भी ज्यादा देर नहीं लगा। छह गज के बॉक्स के भीतर आसान टैप-इन और हैट्रिक पूरी।

स्टेडियम में मौजूद कई दर्शक तब तक अपनी सीटों पर ठीक से बैठ भी नहीं पाए थे। इस तरह की फिनिशिंग के पीछे एक अलग अनुशासन होता है। ब्राज़ील के अधिकांश स्ट्राइकर इसकी जड़ें उन्हीं छोटी-छोटी गलियों और तंग मैदानों में खोजते हैं, जहां सोचने का समय नहीं होता और गलती की कोई गुंजाइश भी नहीं होती। रांची में रोड्रिगिन्हो जिस तरह खाली जगह तलाश रहे थे, उसे देखकर यही अहसास हो ता था।

एससी दिल्ली के लिए यह जीत सिर्फ शानदार प्रदर्शन नहीं थी। इसने टीम को दो मैचों में पूरे छह अंकों के साथ ग्रुप-सी के शीर्ष पर पहुंचा दिया और नॉकआउट चरण के बेहद करीब ला खड़ा किया। हर भारतीय क्लब अपने इतिहास में डूरंड कप का नाम जोड़ना चाहता है और एससी दिल्ली भी अब उसी दिशा में मजबूत कदम बढ़ा चुकी है।

यह सब किसी संयोग का परिणाम नहीं था। भारत आने से बहुत पहले रोड्रिगिन्हो ने एक सोचा-समझा फैसला लिया था। उन्होंने उस देश पर भरोसा किया, जिसे ब्राज़ील में अब भी बहुत से लोग केवल दूर से जानते हैं।

उन्होंने कहा, “ब्राज़ील में हम हमेशा एशियाई फुटबॉल पर नज़र रखते हैं। भारत लगातार आगे बढ़ रहा है और यहां अधिक से अधिक खिलाड़ी आ रहे हैं। कई बड़े ब्राज़ीलियाई खिलाड़ी भी भारत में खेल चुके हैं। इसलिए हमें भारतीय फुटबॉल के बारे में जानकारी थी और मुझे दिल्ली के इस प्रोजेक्ट पर भरोसा था। मुझे खुशी है कि उन्होंने भी मुझ पर विश्वास किया।”

‘भरोसा’ शायद वह शब्द है, जो रोड्रिगिन्हो की हर बात में बार-बार लौटकर आता है। अपने साथियों पर भरोसा, कोचिंग स्टाफ पर भरोसा और उस क्लब पर भरोसा जिसने ऐसे खिलाड़ी पर दांव लगाया, जिसके बारे में भारतीय फुटबॉल जगत लगभग कुछ नहीं जानता था। अब वही फैसला दूरदर्शिता साबित होता दिखाई दे रहा है।

महाद्वीप बदलना कभी आसान नहीं होता। रोड्रिगिन्हो भी इसे स्वीकार करते हैं। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं कि भारतीय खाने की आदत डालने में थोड़ा समय लगा। लेकिन यहां के लोगों ने इस बदलाव को आसान बना दिया।

उन्होंने कहा, “यहां के लोगों के साथ मेरी अच्छी दोस्ती हो गई है। वे बहुत खुले दिल के हैं, बात करना पसंद करते हैं और बेहद जिज्ञासु हैं। वे सीखना चाहते हैं और सुनना चाहते हैं। उनके साथ मेरा समय बहुत अच्छा बीत रहा है।”

यह एक छोटी-सी बात लग सकती है, लेकिन यह बताती है कि कोई फुटबॉलर नए माहौल में अपनी लय कै सेपाता है। रांची की फ्लड लाइट्स के नीचे दिखी उनकी बेफिक्र फुटबॉल अचानक नहीं आई थी। उसके पीछे मैदान से बाहर बना सहज रिश्ता भी उतना ही महत्वपूर्ण था।

जब उनसे पूछा गया कि वे किस खिलाड़ी से सबसे ज्यादा प्रेरित होते हैं, तो जवाब दो हिस्सों में आया। बचपन के आदर्श अब भी नेमार हैं, वही कैनारिन्हो नंबर-10, जिन्हें देखकर लगभग हर ब्राज़ीलियाई बच्चा बड़ा होता है। लेकिन जब उन्होंने अपने खेल की बात की, तो एक दूसरा नाम सामने आया।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मेरा खेल मैथियसकुन्हा से काफी मिलता-जुलता है। वह आगे कई पोजीशन पर खेल सकते हैं। अकेले स्ट्राइकर भी बन सकते हैं और दो लाइनों के बीच भी खेल सकते हैं। मैं उनसे काफी प्रेरणा लेता हूं क्योंकि वह बेहद बहुमुखी खिलाड़ी हैं।”

रांची में यह बहुमुखी प्रतिभा साफ दिखाई दी। कभी वे मिडफील्ड में आकर खेल को जोड़ते थे, तो अगले ही पल सही समय पर बॉक्स में पहुंचकर गोल कर देते थे। जब उनसे कहा गया कि खुद को एक शब्द में बयान करें, तो उन्होंने बिना रुके जवाब दिया।

“मैं ऐसा खिलाड़ी हूं जो मूव को खत्म करता है। मैं हर चीज़ में और बेहतर बनना चाहता हूं।” पांच गोलों के पीछे का इंसान हालांकि बेहद साधारण है। उन्होंने कहा, “मैं बहुत सरल इंसान हूं। मुझे हमेशा मुस्कुराते रहना और अच्छी ऊर्जा के साथ रहना पसंद है।”

फिर जैसे अचानक उन्हें एक बात याद आई। “मुझे सांबा बहुत पसंद है। मैं थोड़ा-बहुत बजा भी लेता हूं।” यह बात उनके खेल से बिल्कुल मेल खाती है।

आखिर सांबा भी तो उसी सहज लय पर टिका होता है, जिसने शुक्रवार की रात उनकी फिनिशिंग को इतना स्वाभाविक बना दिया था—ताल और कल्पनाशीलता का ऐसा मेल, जिसमें खूबसूरती अपने आप जन्म लेती है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं बहुत सरल, खुला और खुश रहने वाला इंसान हूं।मैं चाहता हूं कि सबके साथ शांति और खुशी से रहूं।”

एक रात पूरी कहानी नहीं बदल देती और शायद यह बात रोड्रिगिन्हो सबसे अच्छी तरह जानते हैं। लेकिन डूरंड कप जैसे 135 साल पुराने टूर्नामेंट में अपने पहले ही मुकाबले में पांच गोल करना ऐसी उपलब्धि है, जो आसानी से भुलाई नहीं जाएगी।

एससी दिल्ली अब अपने ग्रुप में शीर्ष पर है और क्वार्टरफाइनल की दहलीज पर खड़ी है। वहीं उसके नए ब्राज़ीलियाई फॉरवर्ड ने साबित कर दिया है कि क्लब को एक ऐसा खिलाड़ी मिल गया है, जो मौके को अंजाम तक पहुंचाना जानता है और जिसने अब इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट के 135 वर्षों के इतिहास में अपना पहला अध्याय लिख दिया है।

ब्राज़ील ने दुनिया को जोगाबोनि तो दिया। शुक्रवार की रात रांची में रोड्रिगिन्हो ने दिल्ली को उसका स्वाद पांच बार चखाया। सांबा बाद में भी हो जाएगा। अभी फुटबॉल खेलना बाकी है।

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