27वें कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में लखनऊ में सस्पेंस थ्रिलर ‘स्वाहा’ नाटक का मंचन

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27वें कारगिल विजय दिवस पर भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए, दर्पण नाट्य संस्था ने सूर्या ऑडिटोरियम में अपने चर्चित सस्पेंस थ्रिलर नाटक ‘स्वाहा’ का मंचन किया।

NSD के पूर्व छात्र शुभदीप राहा द्वारा निर्देशित इस नाटक ने राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया युद्ध और देश के प्रति कर्तव्य को एक साथ पिरोते हुए दर्शकों को रोमांच से भर दिया।

पद्म श्री डॉ. अनिल रस्तोगी को विशेष सम्मान

1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद की पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी मेजर जनरल सूर्य प्रकाश भाटिया (रिटायर्ड) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका किरदार अनुभवी अभिनेता डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी ने निभाया है।

 

इस नाटक में दशकों पहले एक युवा बांग्लादेशी लड़की, शिखा बोस (दिव्या भारद्वाज भट्टाचार्य) को बचाने के बाद, वह एक सीनियर RAW अधिकारी के रूप में वापस आती है और जनरल भाटिया के बेटे, मंदार (शुभम कुमार दुबे) की जांच करती है, जिस पर पाकिस्तान की ISI के लिए जासूसी करने का संदेह है।

RAW एजेंट जस्सी (विकास श्रीवास्तव) की मदद से देशद्रोह का खुलासा होता है, और कहानी एक नाटकीय मोड़ पर पहुँचती है जहाँ जनरल भाटिया अपने बेटे को गोली मारकर पिता के रिश्ते से ऊपर देश के प्रति अपनी निष्ठा को चुनते हैं।

खुशवंत खन्ना (पूर्व एजेंट राकेश कुमार के रूप में) और वीरेंद्र रस्तोगी (घरेलू सहायक सिद्धू के रूप में) ने बेहतरीन कॉमेडी भी की। यह प्रस्तुति अपनी चुस्त गति, विश्वसनीय अभिनय और शानदार सेट डिज़ाइन के लिए खास रही।

 

इस विशेष मंचन में लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल और श्रीमती जयचंद्रन, वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक और गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।

प्रदर्शन के बाद, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने निर्देशक शुभदीप राहा और मंच पर मौजूद सभी कलाकारों—डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी, दिव्या भारद्वाज भट्टाचार्य, शुभम कुमार दुबे, विकास श्रीवास्तव, खुशवंत खन्ना और वीरेंद्र रस्तोगी—को सम्मानित किया।

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उन्होंने उनके शानदार अभिनय और उच्च-स्तरीय थिएटर के प्रति दर्पण नाट्य संस्था की प्रतिबद्धता की सराहना की। शाम का एक मुख्य आकर्षण डॉ. अनिल कुमार रस्तोगी को दिया गया विशेष सम्मान था।

उन्हें थिएटर, सिनेमा और टेलीविज़न में उनके अहम योगदान और हाल ही में मिले पद्म श्री पुरस्कार के लिए यह सम्मान दिया गया, जिस पर दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।

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