औषधीय-सगंध फसलों से बढ़ेगी किसानों की आय, सीमैप में प्रशिक्षण शुरू

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लखनऊ: सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप), लखनऊ में “आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों पर चार दिवसीय कौशल एवं प्रौद्योगिकी उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रम” का शुभारंभ किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 11 राज्यों से कुल 55 प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया है, जो औषधीय एवं सगंध फसलों के प्रति बढ़ती राष्ट्रीय रुचि को दर्शाता है।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को ऑनलाइन संबोधित करते हुए डॉ. ज़बीर अहमद, निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप ने औषधीय एवं सगंध पौधों के महत्व, भविष्य की संभावनाओं तथा किसानों की आय वृद्धि में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने वैज्ञानिक खेती, मूल्य संवर्धन एवं बाज़ार संपर्क को बढ़ावा देने पर जोर दिया तथा प्रतिभागियों को नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

संस्थान के पूर्व निदेशक एवं उत्कृष्ट वैज्ञानिक, सीएसआईआर डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किसानों के साथ समन्वित कार्यों के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में सीएसआईआर-सीमैप के योगदान को रेखांकित किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. संजय कुमार ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए विभिन्न तकनीकी सत्रों, फील्ड विजिट एवं प्रायोगिक गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया।

इससे पूर्व डॉ.आरके श्रीवास्तव ने संस्थान की व्यवसाय विकास गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रतिभागियों को स्टार्टअप, विपणन एवं व्यावसायिक अवसरों का लाभ मिलेगा। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. ऋषिकेश एन. भिसे द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आरएस शर्मा ने प्रस्तुत किया।

तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को सीमैप की गतिविधियों के साथ-साथ लेमनग्रास, गुलाब, पचौली, सिट्रोनेला, मेंथा एवं तुलसी जैसी प्रमुख सगंध फसलों की उन्नत कृषि तकनीकों, आसवन एवं मूल्य संवर्धन की जानकारी प्रदान की गई।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को वैज्ञानिक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल एवं उद्यमिता के अवसर प्रदान कर देश में औषधीय एवं सगंध फसलों के व्यापक प्रसार में सहायक सिद्ध होगा।

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