आयुष-आधारित चिकित्सा के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने हेतु अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और सीएसआईआर-सीमैप के बीच समझौता ज्ञापन

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लखनऊ : आयुर्वेद में सहयोगात्मक अनुसंधान हेतु अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली, आयुष मंत्रालय, तथा सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान के मध्य एक समझौता ज्ञापन तैयार करने के लिए दिनांक 22.05.2026 को सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ में एक बैठक आयोजित की गई।

उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति:
प्रो. वैद्य प्रदीप कुमार प्रजापति, निदेशक, एआईआईए, नई दिल्ली एवं गोवा
वैद्य विवेक अग्रवाल, सह आचार्य, एआईआईए
डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ
डॉ. रमेश कुमार श्रीवास्तव, प्रमुख, व्यवसाय विकास, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ
डॉ. सौम्या पाठक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ
डॉ. ए. के. गुप्ता, वैज्ञानिक जी, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ
डॉ. डी. एन. मणि, वैज्ञानिक जी, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ
डॉ. डी. यू. बावनकुले, वैज्ञानिक जी, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ
डॉ. करुणा शंकर, वैज्ञानिक जी, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ
डॉ. प्रियंका सिंह, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ

समझौता ज्ञापन के अंतर्गत सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

संयुक्त अनुसंधान एवं विकास
यह सहयोग “समग्र रूप से आयुर्वेद” के दृष्टिकोण पर केंद्रित होगा, जिसमें पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के साथ एकीकृत किया जाएगा।

उत्पाद विकास एवं प्रमाणीकरण

सीएसआईआर-सीमैप द्वारा विकसित आयुर्वेदिक सूत्रों का विकास एवं वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, जिसमें चिकित्सीय अनुप्रयोगों हेतु हाइड्रो-अल्कोहलिक अर्क पर संयुक्त अध्ययन शामिल हैं।

क्लिनिकल एवं प्री-क्लिनिकल अध्ययन

प्री-क्लिनिकल परीक्षण सीएसआईआर-सीमैप द्वारा किए जाएंगे तथा हर्बल फॉर्मूलेशन के लिए क्लिनिकल परीक्षण एआईआईए, नई दिल्ली द्वारा संचालित किए जाएंगे।

रोग केंद्रित क्षेत्र: नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग / मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड लिवर रोग, गट-लिवर विकार, एवं रूमेटॉइड आर्थराइटिस। प्रस्तावित क्लिनिकल परीक्षणों में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी पैरामीटर्स एवं NAFLD-संबंधी मार्करों का मूल्यांकन शामिल होगा।

क्षमता निर्माण एवं प्रौद्योगिकी विकास
संयुक्त समिति: समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के पश्चात संयुक्त परीक्षणों की निगरानी एवं देखरेख हेतु एक संयुक्त समिति का गठन।
संरक्षण एवं प्रवर्धन: उन्नत ऊतक संवर्धन विधियों एवं नियंत्रित कृषि द्वारा आरईटी (दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं विलुप्तप्राय) औषधीय पौधों का प्रवर्धन।
सीआरएम का व्यावसायीकरण: सीएसआईआर-सीमैप द्वारा विकसित भारतीय मूल के प्रमाणित संदर्भ सामग्री का व्यावसायीकरण, जिसमें अश्वगंधा एवं कालमेघ शामिल हैं।
संरक्षण: विंध्याचल क्षेत्र के औषधीय पौधों पर विशेष ध्यान।
छात्र विनिमय कार्यक्रम: छात्र विनिमय एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से क्षमता निर्माण।

यह समझौता ज्ञापन (MoU) ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की नैदानिक विशेषज्ञता तथा सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान की फाइटोकेमिकल एवं प्रीक्लिनिकल अनुसंधान क्षमताओं के समन्वय के माध्यम से आयुर्वेदिक औषधीय सूत्रों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण विकसित करने, औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करने तथा आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकृति हेतु गुणवत्ता मानक विकसित करने के उद्देश्य से किया गया है।

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