लखनऊ : किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें औषधीय एवं सगंध फसलों की वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण तथा विपणन की आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ में मंगलवार से चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ।
7 से 10 जुलाई तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में देश के 15 राज्यों से आए 77 किसान, कृषि उद्यमी और ग्रामीण युवा भाग ले रहे हैं, जिनमें 13 महिला किसान भी शामिल हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का विषय “औषधीय एवं सगंध पौधों का उत्पादन, प्राथमिक प्रसंस्करण एवं विपणन” है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मेंथा, खस, तुलसी, लेमनग्रास, एलोवेरा, पामारोजा, जिरेनियम सहित आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध फसलों की वैज्ञानिक खेती,
पौधों से तेल निकालने की आधुनिक तकनीकों, सुरक्षित भंडारण तथा तैयार उत्पादों के प्रभावी विपणन की जानकारी दी जाएगी, ताकि किसान बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक मूल्य प्राप्त कर सकें।
सीमैप में दिया जाएगा आधुनिक खेती, प्रसंस्करण और विपणन का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. संजय कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि चार दिवसीय कार्यक्रम में सीमैप के वैज्ञानिक औषधीय एवं सगंध पौधों की उन्नत खेती, प्रसंस्करण, भंडारण और मूल्य संवर्धन से जुड़ी तकनीकों पर विस्तार से जानकारी देंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नीबूघास, पामारोजा, जिरेनियम और तुलसी जैसे पौधों से प्राप्त आवश्यक तेलों की मांग वैश्विक बाजार में लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने अपने संदेश में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के साथ उनकी आय और रोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान को खेत तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है, ताकि विकसित तकनीकों का सीधा लाभ किसानों को मिल सके।
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प्रशिक्षण के प्रथम दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को मेंथा की उन्नत कृषि तकनीकों, कैमोमाइल एवं ईसबगोल की वैज्ञानिक खेती, जावाघास, खस और गुलाब के उत्पादन, आसवन (डिस्टिलेशन) तथा मूल्य संवर्धन की आधुनिक विधियों की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर सीएसआईआर-सीमैप के वैज्ञानिक, तकनीकी अधिकारी, शोधार्थी तथा संस्थान के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।













