मेरठ के आसमान में पहली बार गरजा सूर्यकिरण, दो दिन में एक लाख से ज्यादा लोगों ने देखा एयर शो

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मेरठ। मेरठ के आसमान में शनिवार और रविवार को पहली बार भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी) के लड़ाकू विमानों ने ऐसी कलाबाजियां दिखाईं कि देखने वालों की नजरें आसमान पर टिक गईं।

लाल-सफेद रंग के नौ हॉक विमानों ने एक-दूसरे के बेहद करीब उड़ान भरते हुए लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और चर्चित डीएनए फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया।

दो दिन चले इस एयर शो को देखने के लिए एक लाख से अधिक लोग पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट और एनएसएस स्वयंसेवक शामिल रहे। खास बात यह रही कि सूर्यकिरण टीम के तीन सदस्य मेरठ से हैं, जिनमें प्रदर्शन करने वाले दो पायलट भी शामिल हैं।

रविवार को रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी एयर शो देखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर सूर्यकिरण के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे अनुशासन, सटीकता, टीमवर्क और पेशेवर दक्षता का शानदार मेल बताया। उन्होंने कहा कि सूर्यकिरण टीम अपनी 30 वर्ष की यात्रा में भारत और विदेशों में 800 से अधिक एयर शो कर चुकी है।

एयर शो के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सूर्यकिरण के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि सूर्यकिरण के पायलटों ने सटीकता और साहस का प्रदर्शन करते हुए आसमान में तिरंगे के रंग बिखेरे। उन्होंने इसे प्रदेश और देश के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण बताया।

एयर शो देखने वालों में राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर तथा विधान परिषद सदस्य अश्विनी त्यागी और धर्मेंद्र भारद्वाज भी शामिल रहे।

पांच मीटर से भी कम दूरी पर उड़ते हैं विमान

2026 के प्रशिक्षण सत्र के सफल समापन के बाद सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने मेरठ में अपना नया फॉर्मेशन लोगों के सामने पेश किया। टीम में शामिल नौ हॉक एमके-132 विमान बेहद करीबी फॉर्मेशन में उड़ान भरते हुए विभिन्न एरोबैटिक करतब दिखाते हैं। इन विमानों का निर्माण भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा लाइसेंस के तहत किया जाता है।

प्रदर्शन के दौरान विमान पांच मीटर से भी कम दूरी पर एक-दूसरे के बेहद करीब रहते हैं। लूप और रोमांचक बैरल रोल के साथ उल्टी उड़ान तथा डीएनए फॉर्मेशन जैसे करतबों ने दर्शकों को रोमांचित किया। इन करतबों के पीछे पायलटों की सटीक उड़ान, अनुशासन, तालमेल और टीम के सदस्यों के बीच भरोसा महत्वपूर्ण होता है।

तिरंगे के रंगों से सजा आसमान

सूर्यकिरण के विमानों में रंगीन धुआं छोड़ने वाले स्मोक पॉड भी लगाए गए हैं। भारतीय वायुसेना के नासिक स्थित बेस रिपेयर डिपो में विकसित इस स्वदेशी तकनीक के जरिये विमानों से केसरिया, सफेद और हरे रंग का धुआं छोड़ा जाता है। प्रदर्शन के दौरान इन रंगों ने आसमान में तिरंगे का दृश्य बनाया।

30 साल में 800 से अधिक एयर शो

सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की स्थापना 1996 में हुई थी। यह एशिया की नौ विमानों वाली एकमात्र एरोबैटिक टीम है और दुनिया की चुनिंदा ऐसी टीमों में शामिल है। टीम अब तक भारत में 800 से अधिक एयर शो कर चुकी है। इसके अलावा चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और दुबई में भी भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व कर चुकी है।

सूर्यकिरण को भारतीय वायुसेना के ‘एम्बेसडर’ के रूप में भी जाना जाता है। टीम के प्रदर्शन के माध्यम से युवाओं को रक्षा सेवाओं में करियर के लिए प्रेरित करने के साथ उन्हें भारतीय वायुसेना के अनुशासन, सटीकता और पेशेवर कार्यशैली को करीब से देखने का अवसर मिलता है।

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