फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती से बढ़ाएं आमदनी : शिवराज चौहान

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लखनऊ। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, कृषि अनुसंधान तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

गन्ने के साथ गेहूं, आलू और तिलहन की खेती अपनाने का सूर्य प्रताप शाही ने किया आह्वान

किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। वह मंगलवार को भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में आयोजित खेत बचाओ अभियान एवं किसान चौपाल को संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की, जबकि उत्तर प्रदेश के कृषि एवं कृषि शिक्षा मंत्री सूर्य प्रताप शाही विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती में जीवामृत और बीजामृत के प्रयोग पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि फसलों में जरूरत से ज्यादा खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल मिट्टी को दूषित कर रहा है। इससे मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने केंचुओं की घटती संख्या पर भी चिंता जताई और किसानों से प्राकृतिक खेती की पद्धतियां अपनाने की अपील की। संस्थान के फार्म पर आयोजित किसान चौपाल में उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर खेती से जुड़ी समस्याओं और उनके अनुभवों की जानकारी भी ली।

इस अवसर पर सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से गन्ने के साथ गेहूं, आलू और तिलहन की खेती कर आय के स्रोत बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक समय भारत खाद्यान्न का आयात करता था, लेकिन आज दूसरे देशों को अनाज निर्यात कर रहा है।

देश में करीब 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने दलहन और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वराशक्ति बनाए रखने पर भी जोर दिया।

किसान चौपाल में हेमंत निराला, प्रदीप द्विवेदी, शिवम मिश्रा, रवींद्र नाथ वर्मा और सरिता देवी सहित कई किसानों ने अपने खेती के अनुभव केंद्रीय मंत्री के साथ साझा किए।

चौपाल में करीब 200 किसानों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही गन्ने की उन्नत उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिसे 400 से अधिक किसानों ने देखा। लखनऊ के किसान शिव कुमार ने खेती में ड्रोन के इस्तेमाल से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए।

संस्थान के निदेशक डॉ. एसएन सुशील ने किसानों को गन्ने की नई किस्मों, उन्नत कृषि यंत्रों और आधुनिक उत्पादन तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने अंतःफसली गन्ना खेती के माध्यम से उत्पादन और आमदनी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, झांसी, बाराबंकी, कानपुर देहात, रायबरेली, उन्नाव और लखीमपुर खीरी सहित विभिन्न जनपदों के करीब 2500 किसानों ने भाग लिया। इस दौरान अनुसूचित जाति के 200 किसानों को संस्थान के निदेशक की ओर से गेहूं और सरसों के बीज वितरित किए गए।

संस्थान परिसर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के लखनऊ स्थित संस्थानों, जनपद के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से 20 स्टॉल भी लगाए गए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और अधिकारियों ने इन स्टॉलों का भ्रमण कर प्रदर्शित कृषि उत्पादों एवं तकनीकों की जानकारी ली।

कार्यक्रम का संचालन संस्थान की मुख्य तकनीकी अधिकारी अनीता सावनानी ने किया, जबकि उत्तर प्रदेश के संयुक्त कृषि सचिव मुकतानन्द अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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