कनेक्टिविटी से सुरक्षा तक, डिजिटल फ्राड को रोक रहा एयरटेल नेटवर्क

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नई दिल्ली। भारत में डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार होने के साथ साइबर धोखाधड़ी के तौर-तरीके भी लगातार जटिल होते जा रहे हैं।

स्पैम कॉल और फिशिंग मैसेज से आगे बढ़कर अब पहचान की चोरी, फर्जी बैंकिंग अनुरोध, दुर्भावनापूर्ण लिंक, निवेश से जुड़े फ्रॉड और ओटीपी के जरिए वित्तीय ठगी जैसे मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में टेलीकॉम नेटवर्क की भूमिका केवल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने तक सीमित न रहकर डिजिटल सुरक्षा तक भी पहुंच रही है।

इसी दिशा में एयरटेल ने नेटवर्क स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की है। कंपनी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उसके ‘सेफ नेटवर्क’ ने 98.4 अरब से अधिक स्पैम कॉल और 4.4 अरब स्पैम मैसेज की पहचान की है।

वहीं, एसएमएस, मैसेजिंग ऐप, ईमेल और ब्राउजर रीडायरेक्ट के जरिए साझा किए गए 1.62 करोड़ से अधिक दुर्भावनापूर्ण लिंक को ब्लॉक किया गया है।

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एयरटेल ने सितंबर 2024 में भारत का पहला नेटवर्क आधारित एआई-संचालित स्पैम डिटेक्शन समाधान शुरू किया था। इसका उद्देश्य नेटवर्क इंटेलिजेंस और एआई का इस्तेमाल कर ग्राहकों को स्पैम कॉल और मैसेज से सुरक्षा देना था।

कंपनी का कहना है कि इसके बाद से उसने इस व्यवस्था का विस्तार करते हुए नेटवर्क स्तर पर डिजिटल सुरक्षा के कई उपाय जोड़े हैं।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में साइबर धोखाधड़ी के कारण भारतीयों को 52,976 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

वहीं, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों में भी साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डिजिटल बैंकिंग, पेमेंट, स्वास्थ्य सेवाओं, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर सुर

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