लखनऊ। भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में 16 से 22 अगस्त 2026 तक गाजर घास जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गाजर घास से होने वाले संभावित स्वास्थ्य एवं कृषि संबंधी खतरों के प्रति संस्थान के कर्मचारियों, अधिकारियों और किसानों को जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक ने की। जागरूकता सप्ताह के तहत 20 अगस्त को संस्थान परिसर में सामूहिक रूप से गाजर घास का उन्मूलन किया गया। इस अभियान में संस्थान के करीब 110 अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर परियोजना समन्वयक (गन्ना) डॉ. दिनेश सिंह, फसल कार्यकी एवं जीव रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एमके श्रीवास्तव, फसल उत्पादन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वीपी सिंह, प्रसार, तकनीकी मूल्यांकन एवं नीति इकाई के प्रभारी डॉ. एलएस गंगवार
तथा कृषि अभियंत्रण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एमके सिंह समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। डॉ. वीपी सिंह ने गाजर घास से होने वाले संभावित खतरों और इसके नियंत्रण की आवश्यकता पर जानकारी दी।
जागरूकता सप्ताह के तहत 21 अगस्त को मोहनलालगंज के अतरौली गांव में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. एलएस गंगवार ने किया।
डॉ. कामता प्रसाद, प्रधान वैज्ञानिक, प्रसार, तकनीकी मूल्यांकन एवं नीति इकाई समेत संस्थान के अधिकारियों ने किसानों को गाजर घास से मनुष्यों, पशुओं और फसलों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों और संभावित खतरों के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान डॉ. बरसाती लाल, डॉ. आरपी साहू, डॉ. अनीता शावनानी, डॉ. जेपी वर्मा और दीप कुमार ने भी किसानों को गाजर घास के दुष्प्रभावों और इसके उन्मूलन के उपायों के बारे में बताया।
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कार्यक्रम के अंतर्गत अतरौली गांव में गाजर घास उन्मूलन अभियान भी चलाया गया। इसमें किसानों के साथ वीएससी कृषि के 22 प्रशिक्षणार्थी विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से भाग लेकर गाजर घास को हटाया।
कार्यक्रम में गांव के करीब 50 महिला और पुरुष किसानों ने सहभागिता की। जागरूकता सप्ताह के माध्यम से किसानों और ग्रामीणों को गाजर घास के प्रसार को रोकने तथा इसके संभावित खतरों से बचाव के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया गया।










