लखनऊ। गैर-संचारी रोगों, खासकर उच्च रक्तचाप और मधुमेह की बढ़ती चुनौती के बीच ओपीडी आधारित उपचार को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच कार्य-साझाकरण की भूमिका अहम हो सकती है।
एम्स नई दिल्ली के निदेशक पद्म श्री डॉ. निखिल टंडन ने सीएसआईआर-सीडीआरआई में 85वें सीएसआईआर स्थापना दिवस व्याख्यान में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की।
सीएसआईआर-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई), लखनऊ के प्रेक्षागृह में ट्रांसलेशनल रिसर्च व्याख्यानमाला के तहत आयोजित कार्यक्रम में डॉ. टंडन मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने “गैर-संचारी रोगों की ओपीडी आधारित देखभाल को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल समाधान और कार्य-साझाकरण” विषय पर व्याख्यान दिया।
डॉ. टंडन ने गैर-संचारी रोगों से जुड़ी बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती और इनके प्रभावी प्रबंधन के लिए ऐसे समाधानों की जरूरत बताई, जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
उन्होंने डिजिटल तकनीक, क्लिनिकल निर्णय-सहायता प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य अभिलेखों के इस्तेमाल को स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता सुधारने में उपयोगी बताया।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के बीच जिम्मेदारियों का उचित और व्यवस्थित वितरण भी रोग प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। कार्य-साझाकरण के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं में उपलब्ध मानव संसाधन का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है और मरीजों तक आवश्यक सेवाएं पहुंचाने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
व्याख्यान के दौरान स्वास्थ्य सेवा की रणनीति तैयार करने से लेकर उसे व्यावहारिक स्वास्थ्य उत्पाद और कार्यक्रम में बदलने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई।
डॉ. टंडन ने रोगी, क्लिनिक और स्वास्थ्य प्रणाली—तीनों स्तरों पर रणनीति विकसित करने, वैज्ञानिक साक्ष्यों के इस्तेमाल और शोध के परिणामों को वास्तविक स्वास्थ्य सेवाओं में लागू करने के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीडीआरआई की छात्र पत्रिका ‘PULSE’ के दूसरे अंक का विमोचन भी किया गया। संस्थान के सेवानिवृत्त सहकर्मियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान, शैक्षणिक गतिविधियों और संस्थान के विकास में उनके योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की। सीएसआईआर-सीडीआरआई के वैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की मौजूदगी रही।
सीएसआईआर स्थापना दिवस व्याख्यान के जरिए ट्रांसलेशनल रिसर्च, नवाचार और शोध को जनस्वास्थ्य से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम ने शोध के परिणामों को प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक उपयोग में बदलने की दिशा में संस्थान के प्रयासों को सामने रखा।
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