कारागारों में आत्महत्या रोकथाम की पहल, RISE में मानसिक स्वास्थ्य पर मंथन

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लखनऊ। बंदियों में अकेलेपन, अवसाद और मानसिक तनाव को कम करने के लिए उनके साथ सरल एवं सहज तरीके से संवाद स्थापित करना जरूरी है।

कारागार स्टाफ बंदियों के दैनिक व्यवहार और गतिविधियों से लगातार परिचित रहता है, ऐसे में काउंसलर्स के साथ समन्वय कर उनकी समस्याओं को समझना अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।

यह बात प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने सोमवार को कारागार मुख्यालय में आयोजित एक दिवसीय RISE (Reduce Inmate Suicide and Emotional Distress) कार्यक्रम में कही।

बंदियों में मानसिक तनाव और अकेलेपन को कम करने के लिए संवाद जरूरी: दारा सिंह चौहान

उन्होंने कहा कि काउंसलर्स और कारागार स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय से बंदियों की मानसिक एवं भावनात्मक समस्याओं की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे कारागार कर्मियों की क्षमता में भी वृद्धि होगी और बंदियों के सुधार एवं पुनर्वास को बेहतर दिशा मिल सकेगी।

कारागार मंत्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में प्रदेश की सभी 75 कारागारों से जेल अधीक्षक, जेलर और डिप्टी जेलर सहित कारागार विभाग के अन्य अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

दारा सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश की कारागारों में बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

इनमें विभिन्न त्योहारों का आयोजन, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, योग, खेलकूद और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से बंदियों को सकारात्मक वातावरण देने और उन्हें एकांत व अकेलेपन की भावना से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

महानिदेशक कारागार पी.सी. मीना ने कहा कि कारागारों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य, सुधार और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

RISE कार्यक्रम इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से बंदियों की मानसिक और भावनात्मक समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें आवश्यक काउंसलिंग एवं सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम के पहले सत्र में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के RISE कार्यक्रम के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. राजीव मिश्रा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कार्यक्रम के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली और अपेक्षित परिणामों की जानकारी दी।

इसके बाद दिव्यांशी सिंह ने RISE डैशबोर्ड का प्रस्तुतीकरण किया और कार्यक्रम की निगरानी एवं प्रगति के लिए विकसित डिजिटल व्यवस्था के बारे में जानकारी दी।

KGMU के ट्रॉमा सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप चौधरी ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बंदियों में मानसिक तनाव, अवसाद और भावनात्मक समस्याओं की पहचान तथा समय रहते उचित सहायता और परामर्श उपलब्ध कराने के महत्व की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रश्नोत्तर एवं संवादात्मक चर्चा हुई। इसमें कारागार अधिकारियों ने मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग और RISE कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न और सुझाव रखे।

विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए कार्यक्रम को कारागारों में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और सुझाव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान महानिदेशक कारागार की ओर से कारागार मंत्री को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

उप महानिरीक्षक कारागार सुभाष चन्द्र शाक्य ने कारागार मंत्री, महानिदेशक कारागार, KGMU के विशेषज्ञों, RISE कार्यक्रम से जुड़े मनोवैज्ञानिकों एवं काउंसलर्स तथा प्रदेश की सभी कारागारों से आए अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। RISE कार्यक्रम का उद्देश्य कारागारों में बंदियों के मानसिक एवं भावनात्मक तनाव को कम करना, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान करना और आत्महत्या की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी एवं संवेदनशील व्यवस्था विकसित करना है।

कार्यक्रम में अपर महानिरीक्षक कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक कारागार प्रदीप गुप्ता, उपमहानिरीक्षक कारागार डॉ. रामधनी और पी.एन. पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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