महेश बाबू और प्रियंका चोपड़ा एक साथ काम करने को लेकर काफी सुर्खियों में हैं। दोनों ने एसएस राजामौली की अपकमिंग फिल्म के लिए हाथ मिलाया है। फैंस राजामौली की इस फिल्म की छोटी से छोटी अपडेट जानने के लिए बेताब हैं।
ऐसे में अब एसएस राजामौली की अपकमिंग एक्शन-एडवेंचर फिल्म का लुक और टाइटल सामने आ चुका है। महेश बाबू का लुक देख फैंस फिल्म को लेकर अब और क्रेजी हो रहे हैं। हैदराबाद में आयोजित ग्लोबट्रॉटर इवेंट में एसएस राजामौली की आने वाली फिल्म का नाम रिवील किया गया है।
Mahesh Babu as RUDHRA in #VARANASI. pic.twitter.com/YMUjnnytWX
— rajamouli ss (@ssrajamouli) November 15, 2025
साथ ही महेश बाबू के दमदार लुक से भी पर्दा उठाया गया। फिल्म का टाइटल वाराणसी है। फर्स्ट लुक में महेश बाबू काफी गुस्से में नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर चोट के घाव हैं और हाथ में एक त्रिशूल है। वहीं, अभिनेता बाबा नंदी पर बैठे हुए अपना रुद्र अवतार दिखाते नजर आए। एक्टर के इस लुक ने इंटरनेट पर आते ही तहलका मचा दिया है।

फिल्म रिलीज के पहले ही यूजर्स वाराणसी को अभी से ब्लॉकबस्टर कहने लगे हैं। बता दें कि इस इवेंट में सुपरस्टार महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और फिल्म में विलेन बने पृथ्वीराज सुकुमारन भी आये। बता दें कि फिल्म वाराणसी से प्रियंका चोपड़ा का लुक पहले ही रिलीज किया जा चुका है।
फिल्म के पोस्टर में प्रियंका पीले रंग की साड़ी पहने हुए और हाथ में बंदूक लिए नजर आई थीं। महेश बाबू की तरह उनका लुक भी काफी शानदार है। मूवी में प्रियंका, मंदाकिनी का किरदार निभा रही हैं। वहीं, फिल्म वाराणसी साल 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है।
इस कार्यक्रम के दौरान निर्देशक ने यह खुलासा किया कि उनकी अगली फिल्म वाराणसी आईमैक्स के 1.43:1 आस्पेक्ट रेशियो में फिल्माई जाएगी। उन्होंने बोला, “हम तेलुगु सिनेमा में एक तकनीकी क्रांति ला रहे हैं। यह फिल्म एक प्रीमियम लार्ज-स्केल फ़ॉर्मेट में तैयार की जाएगी, खासतौर पर आईमैक्स अनुभव के लिए।”
अपनी फिल्मों में प्राचीन पौराणिक प्रतीकों की भरमार के बावजूद, राजामौली ने खुद को धार्मिक हिंदू नहीं बताया। वे नास्तिक हैं, लेकिन उनका मानना है कि उनके दर्शन और आदतें हिंदू धर्म से भी पहले की सांस्कृतिक परंपराओं से निकली हैं।
इससे पहले राजामौली ने 2022 में कहा था, ‘बहुत से लोग सोचते हैं कि हिंदू धर्म एक धर्म है, ये वर्तमान संदर्भ में है। लेकिन हिंदू धर्म से पहले, हिंदू धर्म एक धर्म था। ये ‘वे ऑफ लाइफ’ है। ये दर्शन है।
अगर आप धर्म को लें, तो मैं भी हिंदू नहीं हूं। लेकिन अगर आप धर्मा को लें, तो मैं पूरी तरह से हिंदू हूं। मैं फिल्म (आरआरआर) में जो दिखा रहा हूं, वो वास्तव में एक जीवन पद्धति है, जो कई सदियों और युगों से चली आ रही है।
इसी साल एक इंटरव्यू में राजामौली ने खुलासा किया था कि अपने आस्तिक परिवार में वे क्यों अलग है। उन्होंने कहा था, ‘मुझे याद है बचपन में हिंदू देवताओं के बारे में कहानियां पढ़कर मुझे संदेह होने लगा था।
मुझे लगता था कि ये सब सच नहीं है। फिर मैं अपने परिवार के धार्मिक जोश में फंस गया। मैंने धार्मिक ग्रंथ पढ़ने, तीर्थयात्राओं पर जाने, भगवा वस्त्र पहनने और कुछ साल तक संन्यासी जैसा जीवन जीने का अभ्यास शुरू कर दिया।
फिर कुछ दोस्तों की बदौलत मैं ईसाई धर्म में शामिल हो गया। मैं बाइबल पढ़ता था, चर्च जाता था, और तरह-तरह की चीजें करता था। धीरे-धीरे इन सब बातों ने मुझे यह एहसास दिलाया कि धर्म मूलतः एक तरह का शोषण है।’
राजामौली ने बताया था कि उनके चचेरे भाई और तेलुगू राइटर गुन्नम गंगराजू ने उन्हें रूसी-अमेरिकी लेखिका और दार्शनिक ऐन रैंड से मिलवाया, जिसके बाद उन्होंने ‘धर्म से दूरी बनानी शुरू कर दी।’
उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने उनके उपन्यास (द फाउंटेनहेड और एटलस श्रग्ड) पढ़े और उनसे बहुत प्रेरित हुआ। मुझे उनके दर्शन की ज़्यादा समझ नहीं थी, लेकिन मैं उसके मूल सिद्धांतों को समझ गया।’
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि धर्म से दूर होने के बावजूद वे रामायण और महाभारत जैसे भारतीय पौराणिक महाकाव्यों में क्यों रुचि रखते हैं। उन्होंने बोला, ‘मैंने इन ग्रंथों के धार्मिक पहलुओं से दूरी बनाना शुरू कर दिया था, लेकिन जो बात मेरे साथ रही, वह थी उनके नाटक और कहानी कहने की जटिलता और महानता।’
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