गन्ना किसानों को मिलेगा रोगमुक्त और उन्नत बीज, भाकृअनुप-इस्मा ने किया समझौता

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लखनऊ : भाकृअनुप–भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (भा.कृ.अनु.प–भा.ग.अनु.सं), लखनऊ एवं इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा), नई दिल्ली के बीच आज भाकृअनुप–भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में“गुणवत्ता पूर्ण गन्ना बीज उत्पादन के लिए उन्नत केन्द्र” की स्थापना हेतु समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह पहल उत्तरप्रदेश तथा उपोष्णकटिबंधीयगन्ना क्षेत्र  में चीनी मिलों एवं किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज की उपलब्धता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस सहयोग का उद्देश्य वै ज्ञानिक रूप से प्रबंधित बीज गुणन एवं वितरण प्रणाली विकसित करना है, ताकि चीनी उद्योग को समय बद्ध रूप से रोग मुक्त, आनुवंशिक रूप से शुद्ध, उच्च उत्पादकता वाली तथा क्षेत्र-विशिष्ट गन्ना किस्मों के बीज उपलब्ध कराया जा सके।

इस पहल के अंतर्गत भाकृअनुप–भा.ग.अनु.सं द्वारा विकसित उन्नत किस्मों को शामिल किया जाएगा। समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह का आयोजन भाकृअनुप–भा.ग.अनु.सं, लखनऊ में किया गया, जिसमें भाकृअनुप-आईएसआरआई, इस्मा, चीनीउद्योग तथा अन्य संबंधित संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एस. एन. सुशील, निदेशक, भाकृअनुप–भा.ग.अनु.संनेकी। उन्होंने गन्ना अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान के योगदान को रेखांकित करते हुए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योग के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने संस्थान की रणनीतिक प्राथमिकताओं तथा प्रस्तावित गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन केन्द्र की कार्य योजना की भी रूपरेखा प्रस्तुत की। अश्विनीश्रीवास्तव, संयुक्तसचिव (चीनी), उपभोक्तामामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए विशेष संबोधन दिया।

उन्होंने गन्ना उत्पादन प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए अनुसंधान संस्थानों, चीनी उद्योग एवं अन्य हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला। दीपक बलानी, महानिदेशक, इस्मा, ने समझौता ज्ञापन के माध्यम से अनुसंधान–उद्योग साझेदारी को सुदृढ़ करने की इस्मा की दृष्टि प्रस्तुत की।

उन्होंने वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं संस्थागत क्षमताओं को चीनी उद्योग  की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोगी तकनीकी समाधानों में परिवर्तित करने के महत्व पर बल दिया।

डॉ. एस. सोलोमन, सलाहकार, इस्माएवंपूर्वनिदेशक, भाकृअनुप–भा.ग.अनु.सं, ने  भी अपने विचार व्यक्त करते हुए इस पहल के महत्व तथा गन्ना अनुसंधान को क्षेत्रीय एवं औद्योगिक आवश्यकताओं से जोड़ने पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में प्रमुख चीनी मिलों, उद्योग संगठनों एवं इस्मा के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की सहभागिता रही, जो इस पहल के प्रति उद्योग की सक्रिय भागीदारी एवं समर्थन को दर्शाती है। साथ ही, संस्थान के विभिन्न विभागों एवं इकाइयों के विभागाध्यक्ष एवं प्रभारी अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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