लखनऊ। सीडीआरआई एलुमनाई एसोसिएशन ने अपने मातृ संस्थान सीएसआईआर–केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ के सहयोग से गुरुवार को एक विज्ञान जनजागरूकता (साइंस आउटरीच) कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार की दुनिया से परिचित कराना था। कार्यक्रम का आयोजन सीएसआईआर–सीडीआरआई की निदेशक एवं सीडीआरआई एलुमनाई एसोसिएशन की संरक्षक डॉ. राधा रंगराजन के मार्गदर्शन में किया गया।
इस अवसर पर सीडीआरआई एलुमनाई एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. मधु दीक्षित तथा सचिव डॉ. संजय बत्रा ने बताया कि एसोसिएशन अपने मातृ संस्थान के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर युवाओं को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि यह एसोसिएशन द्वारा आयोजित पहला विज्ञान जनजागरूकता कार्यक्रम है और भविष्य में भी इस तरह की गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
‘समर्थ 2.0’ इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत छात्रों को वास्तविक कार्य परिवेश से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम के अंतर्गत एसोचैम उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड विकास परिषद (ASSOCHAM UP-UK Development Council) की ‘समर्थ 2.0’ इंटर्नशिप पहल से जुड़े 16 विद्यार्थियों ने सीएसआईआर–सीडीआरआई का भ्रमण किया। ये छात्र यूपीईएस देहरादून, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय तथा लखनऊ के बीबीडी विश्वविद्यालय से संबंधित थे।
संस्थान भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को सीडीआरआई में चल रही अत्याधुनिक अनुसंधान गतिविधियों, औषधि खोज एवं विकास, जैव-चिकित्सीय अनुसंधान तथा स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयासों की जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों से संवाद कर अनुसंधान प्रक्रिया, वैज्ञानिक करियर की संभावनाओं तथा प्रयोगशाला से समाज तक विज्ञान की उपयोगिता को समझा।
एसोचैम उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड के ट्रेनिंग एवं इंटर्नशिप कमेटी के चेयरमैन प्रदीप सिंह ने बताया कि ‘समर्थ 2.0’ इंटर्नशिप पहल के तहत परिषद उद्योगों, सरकारी विभागों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के सहयोग से विद्यार्थियों को वास्तविक कार्य परिवेश का अनुभव प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न संस्थानों की कार्यप्रणाली, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों, पर्यावरण, सामाजिक एवं सुशासन (ESG) मानकों तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्राप्त होगी।
औषधि अनुसंधान, जैव-चिकित्सा विज्ञान और वैज्ञानिक करियर की संभावनाओं को समझाा
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को सरकारी विभागों, अनुसंधान संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं और उद्योग जगत में उपलब्ध करियर अवसरों से परिचित कराने में भी सहायक सिद्ध होगा।
इस प्रकार की पहलें विद्यार्थियों की अकादमिक शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव के बीच की दूरी को कम करते हुए उन्हें विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित करती हैं।
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कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान में चल रहे शोध कार्यों में गहरी रुचि दिखाई और वैज्ञानिकों के साथ खुलकर संवाद किया। समापन अवसर पर वैज्ञानिक सोच, नवाचार और कौशल विकास के महत्व पर चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने में युवा प्रतिभाओं की अहम भूमिका होगी और ऐसे कार्यक्रम उन्हें भविष्य के वैज्ञानिक, नवप्रवर्तक और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।












