लखनऊ : मुख्यालय, करागर भवन, लखनऊ में कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, उत्तर प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान (UPSIFS), लखनऊ के मध्य शैक्षणिक, अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया।
समझौता ज्ञापन पर दोनों संस्थाओं के प्रमुख क्रमशः महानिदेशक, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं पी.सी. मीना तथा UPSIFS के निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने हस्ताक्षर कर समन्वय एवं शर्तों के प्रति सहमति व्यक्ति की।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. गोस्वामी सहित UPSIFS के अधिकारियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन के साथ हुआ। इस अवसर पर महानिदेशक कारागार पीसी मीणा ने डॉ जी.के गोस्वामी को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) वर्तमान समय में एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है।
फॉरेंसिक विज्ञान न्याय व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है : डॉ. जीके गोस्वामी
एक ओर कारागारों को केवल दंड देने वाले संस्थान के बजाय सुधार गृह के रूप में स्थापित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था की सोच को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब हमारी व्यवस्था “दंड से न्याय” की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के माध्यम से निर्दोष व्यक्तियों को गलत दोषसिद्धि (Wrongful Convictions) से बचाने तथा दोषियों के विरुद्ध प्रभावी दोषसिद्धि (Convictions) सुनिश्चित करने में फॉरेंसिक की निर्णायक भूमिका है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार फॉरेंसिक क्षमताओं के निरंतर विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान (UPSIFS) की स्थापना की गई।
उन्होंने संस्थान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर सुरक्षा एवं साइबर अपराध जांच की बढ़ती आवश्यकता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि यह एमओयू दोनों संस्थानों के बीच प्रशिक्षण, अनुसंधान, अध्ययन, कार्यशालाओं, विशेषज्ञ व्याख्यान, इंटर्नशिप, पाठ्यक्रम विकास एवं संयुक्त शोध को बढ़ावा देगा।
UPSIFS की आधुनिक प्रयोगशालाओं एवं विशेषज्ञता का लाभ कारागार विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलेगा, जिससे उनकी व्यावसायिक क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं साक्ष्य-आधारित कार्य संस्कृति को सुदृढ़ किया जा सकेगा।
कारागार प्रशासन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नई दिशा देगा एमओयू : पीसी मीना
इस अवसर पर डीजी, कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं, पीसी मीना ने कहा कि यह एमओयू दोनों संस्थानों के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। इससे कारागार प्रशासन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान आधारित निर्णय प्रक्रिया तथा आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
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उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि UPSIFS के साथ यह सहयोग कारागार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कौशल विकास, नवाचार, क्षमता निर्माण तथा अनुसंधान को नई गति देगा और अंततः राज्य की न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने में सहायक होगा।
कार्यक्रम के अंत में उप महानिरीक्षक एस.सी. शाक्य ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर अपर महानिरीक्षक कारागार धर्मेन्द्र सिंह, हेमराज मीणा, DIG UPSIFS, लखनऊ, DIG कारागार प्रदीप गुप्ता, सुभाष शाक्य, पी.एन. पाण्डेय, डॉ. रामधनी, वित्त नियंत्रक आबिद अंसारी, वरिष्ठ अधीक्षक रंगबहादुर पटेल, डॉ हबीब तथा पीआरओ अंकित कुमार, संतोष तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।












