शिया पी.जी. काॅलेज में भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अयातुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही का अभिनंदन

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लखनऊ। शिया पी.जी. काॅलेज, लखनऊ में भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अयातुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही के सम्मान में एक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।

समारोह में कॉलेज प्रबंधन, शिक्षकगण तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। इस अवसर पर शिक्षा, सामाजिक विकास, सांस्कृतिक मूल्यों तथा भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों पर विचार व्यक्त किए गए।

समारोह को संबोधित करते हुए अयातुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने शिया पी.जी. काॅलेज में आने पर प्रसन्नता व्यक्त की और शिक्षा तथा समाज के क्षेत्र में संस्थान के लंबे योगदान की सराहना की।

भारत में हाल ही में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया और उन्होंने भारत सरकार द्वारा इसकी मेजबानी के लिए आभार व्यक्त किया।

शिया पी.जी. काॅलेज के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्होंने इस संस्थान के बारे में काफी सुना है और पिछले 108 वर्षों में समाज के लिए इसके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह काॅलेज केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि यहां शिक्षा, इतिहास और संस्कृति एक साथ दिखाई देते हैं। उन्होंने लखनऊ को शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए भारतीय संस्कृति में शहर की भूमिका की भी सराहना की।

उन्होंने कहा कि शिया पी.जी. काॅलेज और लखनऊ का इतिहास एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है। काॅलेज की बहुसंस्कृति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यहां विभिन्न धर्मों से जुड़े शिक्षक बिना किसी भेदभाव के विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने इस विविधता को समाज के विकास और उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।

शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए हकीम इलाही ने कहा कि शिया समुदाय का ज्ञान और शिक्षा के साथ बहुत पुराना संबंध रहा है। उन्होंने प्रसिद्ध विद्वान आगा बुजुर्ग तेहरानी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने शिया विद्वानों और समाज के सभ्यतागत विकास में योगदान को दस्तावेजीकृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

उन्होंने कहा कि संस्थाएं और समुदाय केवल अपने गौरवशाली इतिहास पर निर्भर होकर आगे नहीं बढ़ सकते। उन्होंने शिक्षा के निरंतर विकास और प्रसार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हमें केवल अपने अतीत पर गर्व करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए।

उन्होंने शिक्षकों और संस्थान से जुड़े लोगों से यह विचार करने का आह्वान किया कि जिस प्रकार पूर्वजों ने शिक्षा के विकास के लिए कार्य किया, उसी प्रकार वर्तमान पीढ़ी शिक्षा के क्षेत्र में क्या योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण निरंतर प्रयासों से ही संभव है।

हकीम इलाही ने सुझाव दिया कि शिया पी.जी. काॅलेज की पहचान केवल धार्मिक संस्था तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक विकास और संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी स्थापित होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से धार्मिक ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने तथा तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

उन्होंने अमानत की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि अमानत केवल धन या आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं है। कोई इमारत, संस्थान का नाम, ट्रस्ट अथवा आने वाली पीढ़ियां भी अमानत हो सकती हैं। उन्होंने शिया पी.जी. काॅलेज को पूर्वजों के प्रयासों से प्राप्त एक अमानत बताते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह इस विरासत को आगे बढ़ाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे और मजबूत बनाए।

उन्होंने कहा कि अहलेबैत (अ.स.) का जीवन केवल सुनने और चर्चा करने के लिए नहीं, बल्कि उनके आदर्शों पर अमल करने के लिए है। उन्होंने इमाम अली (अ.स.) के न्याय और इमाम जाफर-ए-सादिक (अ.स.) के शैक्षणिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इन आदर्शों और मूल्यों का प्रतिबिंब हमारे व्यवहार और जीवन में किस प्रकार दिखाई देता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अहलेबैत (अ.स.) की शिक्षाओं की भावना पर स्थापित संस्थान को संवाद और आपसी समझ का मंच भी बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने अच्छे आचरण, अखलाक और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज के लिए उदाहरण बनें। उन्होंने कहा कि दुनिया में होने वाले अनेक विकास और समस्याएं मानव के कार्यों का परिणाम हैं और समाज को बेहतर बनाने के लिए मनुष्य को ही सकारात्मक भूमिका निभानी होगी।

मौलाना यासूब अब्बास, सचिव, मजलिस-ए-उलेमा, ने शिक्षा और समाज के क्षेत्र में शिया पी.जी. कॉलेज के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह समुदाय स्तर पर एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है, जो पिछले 108 वर्षों से संचालित है और जिसमें लगभग 10,000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

उन्होंने आगे कहा कि समुदाय में शिक्षा के स्तर को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने काॅलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि काॅलेज ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमाण पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के अंतर्गत प्रदेश के 6,000 से अधिक काॅलेजों में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि काॅलेज के विद्यार्थी प्रत्येक वर्ष लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 10 से अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त कर रहे हैं। कॉलेज के प्रबंधक अब्बास मुर्तजा शम्सी ने भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि शिया पी.जी. कॉलेज एक बहुसांस्कृतिक शैक्षणिक संस्थान है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत और ईरान के बीच इस प्रकार के संवाद और संपर्क दोनों देशों की मित्रता एवं सहयोग को और मजबूत करेंगे।

बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के वरिष्ठ सदस्य डाॅ0 एस.एस.एच. तकवी ने अपने वक्तव्य में कहा कि शिया कॉलेज लगातार छात्रों को विश्वस्तरीय उत्कृष्ट शिक्षा देने हेतु प्रयासरत रहा है और आगे भी रहेगा। कॉलेज में छात्रों के पठन-पाठन के साथ उनके सर्वांगीण विकास को भी ध्यान में रखकर शिक्षा प्रदान की जा रही है।

निदेशक, आई.क्यू 0ए0सी0, डाॅ0 एम.एम. अबु तैयब ने कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कॉलेज को नैक द्वारा ‘ए’ ग्रेड प्राप्त करने की जानकारी दी।

उन्होंने अवध के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिया पी.जी. काॅलेज इस समृद्ध विरासत का एक महत्वपूर्ण परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान की भौगोलिक सीमाएं अलग होने के बावजूद भी इमाम अली (अ.स) की विलायत से जुड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं।

बोर्ड आफ ट्रस्टीज के अध्यक्ष प्रो. अजीज हैदर ने विशिष्ट अतिथि का स्वागत किया और समारोह में शामिल होने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। प्राचार्य प्रो. शबीहे रजा बाकरी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला।

समारोह में कॉलेज प्रबंधन एवं विभिन्न संकायों के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। विधि संकायाध्यक्ष प्रो. सै. सादिक हुसैन आबिदी, प्रो. मेहदी अब्बास, प्रभारी, कला संकाय, प्रो. टी.एस. नकवी, प्रभारी, विज्ञान संकाय, प्रो. अंजुम अबरार, प्रभारी, वाणिज्य संकाय, प्रो. एस.एम. हसनैन, कोऑर्डिनेटर, विधि संकाय स्ववित्तपोषित, डाॅ0 प्रदीप शर्मा, निदेशक, एस.सी.डी.आर.सी., प्रो. बी.बी. श्रीवास्तव, कोऑर्डिनेटर एम.एससी. भौतिक, प्रो. नूरुल हसन, डाॅ0 मीसम मुबारक, कोऑर्डिनेटर बी.बी.ए., डाॅ0 सै. अली मजाहिर रिज़वी तथा डाॅ. अरमान तकवी सहित सभी शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी व छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।

समारोह का समापन भारत-ईरान संबंधों, शैक्षणिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी संपर्क को और मजबूत करने की भावना के साथ हुआ।

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