लखनऊ। भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर), लखनऊ में बुधवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत प्रशिक्षण, कृषि सामग्री वितरण तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने किया। अपने संबोधन में लक्ष्मी नारायण चौधरी ने भारतीय कृषि के विकास में आईसीएआर और कृषि वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि एक समय भारत खाद्यान्न आयात पर निर्भर था,
आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस पर किसानों को मिली आधुनिक खेती की सौगात
जबकि आज देश कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के साथ कृषि उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के योगदान को याद करते हुए नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति किसानों में अधिक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने के लिए खाद्य तेलों और दलहनों के आयात पर निर्भरता कम करना आवश्यक है।
साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिक जल उपयोग दक्षता, कम अवधि में तैयार होने वाली तथा प्रमुख कीटों एवं रोगों के प्रति प्रतिरोधी जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों के विकास पर जोर दिया।
गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य बताते हुए कहा कि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और किसान-केंद्रित प्रयासों के माध्यम से प्रदेश में प्रति हेक्टेयर 115 टन गन्ना उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री की परिकल्पना के अनुरूप देश में 100 स्मार्ट गांव विकसित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता भी बताई।
संस्थान के निदेशक डॉ. एस.एन. सुशील ने संस्थान में संचालित अनुसंधान परियोजनाओं, उन्नत गन्ना उत्पादन तकनीकों तथा किसानों के लिए विकसित नवीन प्रौद्योगिकियों की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों को आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस समारोह का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया।
अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत मलिहाबाद और बख्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र के 100 किसानों एवं महिला कृषकों को कृषि सामग्री वितरित की गई।
इस अवसर पर फसल सुधार विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने उन्नत गन्ना किस्मों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. एन.के.के. राठौड़ ने गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज उत्पादन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान परिसर स्थित प्रकृति समरसता उपवन में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक, वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनीता सावनानी ने किया, जबकि परियोजना समन्वयक (गन्ना) डॉ. दिनेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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