शिया पीजी कॉलेज की 108 वर्षों की विरासत को हकीम इलाही ने सराहा

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लखनऊ। शिया पीजी कॉलेज में भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अयातुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही के सम्मान में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।

समारोह में कॉलेज प्रबंधन, शिक्षक, ट्रस्टी, विभिन्न संकायों के सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे। इस दौरान शिक्षा, सामाजिक विकास, सांस्कृतिक मूल्यों तथा भारत-ईरान के ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा हुई।

अपने संबोधन में हकीम इलाही ने शिया पीजी कॉलेज में पहुंचने पर प्रसन्नता जताते हुए शिक्षा और समाज के क्षेत्र में संस्थान के 108 वर्षों के योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कॉलेज केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि यहां शिक्षा के साथ इतिहास और संस्कृति की भी झलक मिलती है। उन्होंने लखनऊ को शिक्षा और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए शहर की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया।

उन्होंने कॉलेज की बहुसांस्कृतिक पहचान की सराहना करते हुए कहा कि विभिन्न धर्मों से जुड़े शिक्षक यहां बिना भेदभाव के विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे हैं। उनके अनुसार ऐसी विविधता समाज के विकास और आपसी समझ को मजबूत करने का अवसर देती है।

हकीम इलाही ने कहा कि शिया समुदाय का शिक्षा और ज्ञान से पुराना संबंध रहा है। उन्होंने प्रसिद्ध विद्वान आगा बुजुर्ग तेहरानी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने शिया विद्वानों और उनके सभ्यतागत योगदान को दस्तावेजीकृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

उन्होंने कहा कि किसी संस्था या समुदाय के लिए केवल अपने गौरवशाली अतीत पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विकास और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य तैयार करने के प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने शिया पीजी कॉलेज को पूर्वजों के प्रयासों से मिली अमानत बताते हुए कहा कि इस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। उनके अनुसार अमानत केवल धन या संपत्ति तक सीमित नहीं होती, बल्कि कोई संस्था, उसकी पहचान और आने वाली पीढ़ियां भी अमानत हो सकती हैं।

हकीम इलाही ने विद्यार्थियों से धार्मिक ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा में भी उत्कृष्टता हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।

साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि कॉलेज की पहचान केवल धार्मिक संस्था के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक विकास, संवाद और आपसी समझ के केंद्र के रूप में भी मजबूत होनी चाहिए।

उन्होंने अहलेबैत (अ.स.) की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जीवन और आदर्शों को केवल सुनने या चर्चा करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें व्यवहार और जीवन में उतारने का प्रयास होना चाहिए।

उन्होंने इमाम अली (अ.स.) के न्याय और इमाम जाफर-ए-सादिक (अ.स.) के शैक्षणिक योगदान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से अच्छे आचरण, अखलाक और नैतिक मूल्यों के साथ समाज के लिए उदाहरण बनने की अपील की।

इससे पहले मजलिस-ए-उलेमा के सचिव मौलाना यासूब अब्बास ने शिया पीजी कॉलेज के शैक्षणिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कॉलेज पिछले 108 वर्षों से संचालित है और इसमें करीब 10 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

उन्होंने कॉलेज की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमाण पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कॉलेज ने प्रदेश के छह हजार से अधिक कॉलेजों में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने यह भी बताया कि कॉलेज के विद्यार्थी हर वर्ष लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 10 से अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त कर रहे हैं।

कॉलेज के प्रबंधक अब्बास मुर्तजा शम्सी ने हकीम इलाही का स्वागत करते हुए कहा कि शिया पीजी कॉलेज एक बहुसांस्कृतिक शैक्षणिक संस्थान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और ईरान के बीच इस तरह के संवाद दोनों देशों के बीच मैत्री और सहयोग को और मजबूत करेंगे।

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बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के वरिष्ठ सदस्य डॉ. एसएसएच तकवी ने कहा कि कॉलेज विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा देने के साथ उनके सर्वांगीण विकास पर भी लगातार काम कर रहा है।

वहीं, आईक्यूएसी के निदेशक डॉ. एमएम अबु तैयब ने कॉलेज की शैक्षणिक उपलब्धियों और नैक से ‘ए’ ग्रेड मिलने की जानकारी दी। उन्होंने अवध की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में शिया पीजी कॉलेज के योगदान का भी उल्लेख किया।

बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के अध्यक्ष प्रो. अजीज हैदर ने विशिष्ट अतिथि का स्वागत किया। प्राचार्य प्रो. शबीहे रजा बाकरी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला।

समारोह में विधि संकायाध्यक्ष प्रो. सै. सादिक हुसैन आबिदी, प्रो. मेहदी अब्बास, प्रो. टीएस नकवी, प्रो. अंजुम अबरार, प्रो. एसएम हसनैन, डॉ. प्रदीप शर्मा, प्रो. बीबी श्रीवास्तव, प्रो. नूरुल हसन, डॉ. मीसम मुबारक, डॉ. सै. अली मजाहिर रिजवी, डॉ. अरमान तकवी सहित कॉलेज के शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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