स्मार्ट कक्षाएँ विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव : डॉ. राजेश्वर सिंह

0
51

लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोमवार को पारा स्थित राज एस्टेट पब्लिक स्कूल में एसोसिएशन ऑफ 41 क्लब्स ऑफ इंडिया एवं क्लब-95 लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘फ्रीडम थ्रू डिजिटल एजुकेशन’ कार्यक्रम के तहत 44वीं अत्याधुनिक स्मार्ट कक्षा का लोकार्पण किया।

इस अवसर पर उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और डिजिटल सशक्तीकरण को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए इसे राष्ट्रीय मिशन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

राज एस्टेट पब्लिक स्कूल में 44वें अत्याधुनिक स्मार्ट क्लास का किया लोकार्पण

डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा कार्य केवल भवनों का निर्माण नहीं, बल्कि शिक्षित, संस्कारित, तकनीकी रूप से सक्षम और चरित्रवान नागरिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा, नवाचार, वैज्ञानिक सोच, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता का विकास करना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती आठ वर्ष उसके बौद्धिक और व्यक्तित्व विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान स्मार्ट कक्षाएं और डिजिटल शिक्षण संसाधन बच्चों को अनुभव आधारित शिक्षा उपलब्ध कराते हैं, जिससे उनमें रचनात्मक सोच, तार्किक क्षमता और समस्या समाधान कौशल विकसित होता है।

डॉ. सिंह ने डिजिटल रूप से सक्षम भारत को देश का अगला राष्ट्रीय मिशन बनाने की वकालत करते हुए वर्ष 2030 तक प्रत्येक विद्यालय में शत-प्रतिशत ब्रॉडबैंड सुविधा,

देश की 95 प्रतिशत आबादी तक इंटरनेट की पहुंच, कक्षा छह से कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की शिक्षा, प्रत्येक माध्यमिक छात्र को डिजिटल अध्ययन उपकरण तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत में डिजिटल पुस्तकालय स्थापित करने का लक्ष्य तय करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा अब विलासिता नहीं, बल्कि विकसित भारत की अनिवार्य आवश्यकता है। तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम है।

डॉ. सिंह ने बताया कि सरोजनीनगर में जुलाई 2022 से चलाए जा रहे डिजिटल पुस्तकालय एवं स्मार्ट कक्षा अभियान के तहत अब तक 37 विद्यालयों में 450 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराकर डिजिटल प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। सोमवार को 44वीं स्मार्ट कक्षा के लोकार्पण के साथ इस अभियान को नई गति मिली है।

ये भी पढ़ें : ‘प्लास्टिक सर्जरी सौंदर्य ही नहीं, बल्कि जीवन व आत्मविश्वास लौटाने का माध्यम’

उन्होंने बताया कि अब तक 2,000 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को टैबलेट वितरित किए जा चुके हैं। वहीं 15 आरबीएस डिजिटल सशक्तीकरण केंद्रों के माध्यम से 1,000 से अधिक विद्यार्थियों को डिजिटल कौशल का प्रशिक्षण तथा 8,000 से अधिक नागरिकों को निःशुल्क ई-गवर्नेंस सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

इन केंद्रों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, ग्राफिक डिजाइन, वीडियो एडिटिंग और अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें जिज्ञासु बनने, निरंतर सीखने और नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा को विद्यालयी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा, “यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे विश्व के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करें, तो उन्हें आज ही विश्वस्तरीय कक्षाएं उपलब्ध करानी होंगी। स्मार्ट कक्षाएं कोई विलासिता नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता हैं।”

कार्यक्रम में डॉ. राजेश्वर सिंह के बड़े भाई एवं उत्तर प्रदेश रेरा के सदस्य रामेश्वर सिंह, विद्यालय के संस्थापक प्रबंधक राज बाबू रस्तोगी, प्रबंध निदेशक आकांक्षा रस्तोगी, प्रधानाचार्या प्रियंका भारद्वाज,

एसोसिएशन ऑफ 41 क्लब्स ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपिंदर सिंह, क्षेत्र-9 के अध्यक्ष मनीष टंडन, उपाध्यक्ष रजनीश सेठी, क्लब-95 लखनऊ के अध्यक्ष विवेक जायसवाल, नीलम कोहली, डॉ. अनुराग देवान सहित अनेक गणमान्य अतिथि, शिक्षाविद् और विद्यार्थी उपस्थित रहे

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here