‘मेन इन पिंक’ का दमदार आगाज, डूरंड कप में लैंगस्निंग ने मचाया तहलका

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कुछ फुटबॉल क्लब किसी टूर्नामेंट में सिर्फ हिस्सा लेने आते हैं, जबकि कुछ उसे खुद को साबित करने के मंच के रूप में देखते हैं। 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप में दो मुकाबले खेलने के बाद शिलांग की लैंगस्निंग एफसी ने साफ कर दिया है कि वह दूसरी श्रेणी की टीम है।

एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट में पहली बार हिस्सा ले रही इस टीम ने अब तक ऐसे दो प्रदर्शन किए हैं, जिन्होंने समर्थकों की कल्पनाओं को नई उड़ान दी है। पहला प्रदर्शन था मुम्बे एफसी पर 5-0 की शानदार जीत, जो हाल के वर्षों में किसी भी क्लब की सबसे प्रभावशाली डेब्यू जीतों में से एक रही।

दूसरा मुकाबला पूरी तरह अलग था, लेकिन शायद उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण। स्थानीय प्रतिद्वंद्वी नोंगकसेह एसएस एंड सीसी के खिलाफ दो गोल से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए 2-2 की बराबरी, जिसने केवल उनकी आक्रामक क्षमता ही नहीं बल्कि जुझारूपन को भी सामने रखा।

इन दोनों विपरीत प्रदर्शनों के बीच एक युवा टीम की वह कहानी छिपी है, जो अब यह विश्वास करने लगी है कि भारतीय फुटबॉल के सबसे बड़े मंचों में से एक पर उसका भी अधिकार है।

लैंगस्निंग का यह उभार किसी संयोग का परिणाम नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में क्लब ने लगातार प्रगति की है और मेघालय की सबसे प्रतिस्पर्धी टीमों में अपनी जगह बनाई है। इसी प्रदर्शन के दम पर उसे इस वर्ष डूरंड कप में जगह मिली।

हालांकि राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं से निकलकर देश के सबसे बड़े क्लबों और अनुभवी टीमों के खिलाफ खेलना बिल्कुल अलग चुनौती थी। पहले मुकाबले से पहले कई सवाल उठ रहे थे। क्या डेब्यू करने वाली यह टीम इस बड़े अवसर के दबाव को संभाल पाएगी? क्या वह अनजाने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अपनी शैली थोप सकेगी? क्या अनुभव की कमी भारी पड़ेगी?

मुम्बे एफसी के खिलाफ पहले 45 मिनट तक ये सवाल बने रहे। लैंगस्निंग ने गेंद पर नियंत्रण रखा, लगातार विपक्षी रक्षा पंक्ति को फैलाया और इतने मौके बनाए कि मुकाबला पहले ही खत्म हो सकता था, लेकिन गोल नहीं आया। चूके हुए मौकों की निराशा के साथ टीम बिना किसी गोल के हाफ टाइम तक ड्रेसिंग रूम लौटी।

मुख्य कोच ख्लाइन पिरखात सिएमलिह ने बड़े सामरिक बदलाव करने के बजाय खिलाड़ियों को एक बेहद सरल बात याद दिलाई। उन्होंने बाद में कहा, “पहले हाफ में खिलाड़ी हमारी योजना के अनुसार नहीं खेल रहे थे। ड्रेसिंग रूम में मैंने उनसे पूछा कि वे हमारी रणनीति का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं। जैसे ही उन्होंने दोबारा वैसा खेलना शुरू किया, हमने मैच पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया।”

इसके बाद जो हुआ, वह केवल दूसरे हाफ का बेहतर प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक स्पष्ट संदेश था। दूसरे हाफ की शुरुआत के छह मिनट बाद सैयद अहमद ने कॉर्नर से शानदार हेडर लगाकर लैंगस्निंग का डूरंड कप इतिहास का पहला गोल किया। इसके साथ ही जैसे मैच की दिशा ही बदल गई।

अहमद ने एक और गोल किया, जबकि किशोर खिलाड़ी किरमेंस्केम मुखिम, डिबोर्मी चानलांग की ओ कासर और सैमुअल फावा ने भी गोल दागकर 5-0 की ऐतिहासिक जीत दर्ज की और ग्रुप-ई की बाकी टीमों को स्पष्ट संदेश दे दिया। उस शाम दो गोल करने वाले अहमद के लिए यह पल एक लंबे समय से संजोए गए सपने के पूरा होने जैसा था।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत शानदार महसूस हो रहा है। सबसे पहले मैं अल्लाह का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझे यह मौका दिया। यह मेरा पहला डूरंड कप है और अल्हम्दुलिल्लाह, मैंने दो गोल किए। इंशाअल्लाह, अगले मैचों में और गोल करूंगा और टीम को क्वालिफाई कराने में मदद करूंगा।”

जब उन्हें याद दिलाया गया कि वह हैट्रिक से चूक गए, तो उनका जवाब आत्मविश्वास और विनम्रता दोनों से भरा था। “कोई बात नहीं,” उन्होंने हंसते हुए कहा। “अगले मैच में।”

अगर अहमद लैंगस्निंग के सबसे बड़े सितारे बनकर उभरे हैं, तो क्लब की सफलता का आधार पूरी टीम है, जो मेघालय फुटबॉल की युवा ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। कोच सिएमलिह ने बताया कि उनकी टीम की औसत उम्र लगभग 24 वर्ष है और पांच-छह खिलाड़ी अभी भी 20 वर्ष से कम आयु के हैं।

उन्हीं युवा खिलाड़ियों में से एक हैं 18 वर्षीय किरमेंस्केम मुखिम, जिन्होंने अपने पहले ही डूरंड कप मुकाबले में शानदार गोल कर यादगार शुरुआत की। लेकिन इस आत्मविश्वासी प्रदर्शन के पीछे वही घबराहट थी, जिससे हर युवा खिलाड़ी पहली बार बड़े मंच पर उतरते समय गुजरता है।

उन्होंने स्वीकार किया, “यह मेरा पहला डूरंड कप था। जब मैं मैदान पर उतरा तो मुझे डर लग रहा था। लेकिन जैसे ही मैच शुरू हुआ, मेरा डर खत्म हो गया।” उनके सपने केवल एक गोल तक सीमित नहीं हैं। “मैं किसी बड़े क्लब के लिए खेलना चाहता हूं और उम्मीद है कि एक दिन भारत के लिए भी खेलूंगा।”

यही वे सपने हैं, जिन्हें डूरंड कप एक सदी से भी अधिक समय से संवारता आया है। इस टूर्नामेंट ने हमेशा युवा खिलाड़ियों को मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खुद को परखने का अवसर दिया है और लैंगस्निंग के उभरते खिलाड़ियों ने इस मंच को पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनाया है।

अगर मुम्बे एफसी पर जीत ने लैंगस्निंग के आगमन की घोषणा की, तो दूसरे मुकाबले ने उनकी एक और पहचान सामने रखी।

नोंगकसेह एसएस एंड सीसी के खिलाफ मुकाबला सामान्य ग्रुप मैच नहीं था। पिछले कुछ महीनों में दोनों क्लबों के बीच मेघालय फुटबॉल की सबसे दिलचस्प प्रतिद्वंद्विताओं में से एक विकसित हुई है। इसी वर्ष एसएसए चैंपियंस कप सेमीफाइनल और मेघालय स्टेट लीग फाइनल दोनों में नोंगकसेह ने जीत दर्ज की थी।

लेकिन डूरंड कप का यह मुकाबला अलग मायने रखता था। इस बार स्थानीय प्रतिष्ठा के साथ-साथ नॉकआउट दौर में पहुंचने की दौड़ भी दांव पर थी। लैंगस्निंग ने मुकाबले की शुरुआत शानदार की। उन्होंने लगातार दबाव बनाया, दो बार गोल लाइन से गेंद हटाई गई और अहमद का एक शानदार गोल ऑफसाइड के कारण रद्द कर दिया गया।

लेकिन फुटबॉल अक्सर चूके हुए मौकों की कीमत वसूलता है। नोंगकसेह ने शानो तारियांग और कप्तान हार्डी नोंगब्री के गोलों की बदौलत हाफ टाइम तक 2-0 की बढ़त बना ली और लैंगस्निंग के समर्थकों को शांत कर दिया।

तीन दिन पहले पांच गोल करने वाली टीम अब अपनी सपनों जैसी शुरुआत बिखरती हुई देख रही थी। लेकिन यहीं से शायद टूर्नामेंट में उनका सबसे प्रभावशाली दौर शुरू हुआ। दूसरे हाफ की शुरुआत के पांच मिनट के भीतर सब कुछ बदल गया।

मेबानश्नगैन कुरकलांग ने लंबे थ्रो से आए गेंद पर शानदार हेडर लगाकर अंतर कम किया। दो मिनट बाद अहमद ने फिर एक बार ऊंची छलांग लगाकर हेडर के जरिए गोल दागा और स्कोर 2-2 कर दिया। पूरा स्टेडियम रोमांच से गूंज उठा। शिलांग डर्बी अब पूरी तरह खुल चुका था। कुरकलांग के जश्न के पीछे भी एक बेहद निजी कहानी थी।

उन्होंने बाद में कहा, “मैंने अपनी मां से कहा था कि आज गोल करूंगा। इसलिए यह गोल मैंने उनके लिए किया… और अपनी जिंदगी के प्यार वेरोनिका के लिए। और सबसे बढ़कर, भगवान का धन्यवाद।” हालांकि किसी भी टीम को विजयी गोल नहीं मिला, लेकिन यह 2-2 का ड्रॉ सिर्फ एक अंक से कहीं अधिक मायने रखता था। लैंगस्निंग ने दिखा दिया कि जब सब कुछ हाथ से निकलता हुआ दिखे, तब भी वह वापसी कर सकती है।

अहमद पूरे मैच के दौरान सिर पर चोट के बावजूद खेलते रहे और उसी जोश के साथ टीम का नेतृत्व करते रहे, जिसने पूरे टूर्नामेंट में उनकी पहचान बनाई है। यह दृश्य मानो लैंगस्निंग के अभियान की सबसे सटीक तस्वीर था—सिर्फ इसलिए यादगार नहीं कि सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, बल्कि इसलिए कि मुश्किल हालात में भी उन्होंने हार नहीं मानी।

यही जुझारूपन कोच सिएमलिह ने इस अपेक्षाकृत अनुभवहीन टीम में विकसित किया है। इससे पहले वह बोडोलैंड एफसी को डूरंड कप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा चुके हैं, इसलिए वह टूर्नामेंट फुटबॉल की मांग और संतुलन बनाए रखने की अहमियत को भलीभांति समझते हैं।

मुम्बे एफसी पर जीत के बाद उन्होंने कहा, “हर कोई खुश है। हमारे अधिकांश खिलाड़ी युवा हैं, इसलिए वे इस जीत से बेहद उत्साहित थे। लेकिन हमारा लक्ष्य वही है—अगले चरण में पहुंचना।”

अब यह लक्ष्य अवास्तविक नहीं लगता। दो मैचों में चार अंक, सात गोल और अब तक अजेय रहने का रिकॉर्ड—लैंगस्निंग ने ग्रुप-ई के निर्णायक चरण में खुद को मजबूत दावेदार बना लिया है।

उससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उसने साबित कर दिया है कि उसके खेल में कई आयाम हैं। वह मुम्बे एफसी के खिलाफ की तरह आक्रामक फुटबॉल से विपक्ष को पूरी तरह दबा सकती है और नोंगकसेह के खिलाफ की तरह कठिन परिस्थितियों में भी वापसी कर सकती है।

डूरंड कप में पदार्पण कर रही किसी टीम के लिए यही अनुकूलन क्षमता उसके गोलों जितनी ही प्रभावशाली रही है।
टूर्नामेंट के बाकी मुकाबलों में जो भी हो, लैंगस्निंग पहले ही एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर चुकी है। उसने यह सुनिश्चित कर दिया है कि 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप की चर्चा अब केवल भारतीय फुटबॉल के स्थापित क्लबों तक सीमित न रहे।

निडर आक्रामक फुटबॉल, उम्मीदों के बोझ से मुक्त युवा टीम और अनुभव की कमी के बावजूद अद्भुत जुझारूपन के दम पर ‘मेन इन पिंक’ ने इस टूर्नामेंट की कहानी में अपनी अलग पहचान बना ली है। उनकी यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। शिलांग लाजोंग एफसी के खिलाफ मुकाबला अभी बाकी है और क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने की संभावना भी पूरी तरह जीवित है।

लेकिन निर्णायक क्षणों से पहले ही लैंगस्निंग ने यह याद दिला दिया है कि डूरंड कप आखिर इतना खास क्यों है। यह वह टूर्नामेंट है, जहां सीटी बजते ही पुरानी प्रतिष्ठा का महत्व कम हो जाता है, जहां युवा खिलाड़ी बिना किसी डर के बड़े सपने देख सकते हैं और जहां मौके को पूरी तरह अपनाने वाले क्लब देखते ही देखते पूरे देश की चर्चा बन जाते हैं। लैंगस्निंग एफसी के लिए यह कहानी अभी बस शुरू हुई है।

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