सीएसआईआर-सीडीआरआई में “वैश्विक परिप्रेक्ष्य में औषधि अनुसंधान एवं विकास” विषय पर वैज्ञानिक राजभाषा संगोष्ठी-2026 का आयोजन

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लखनऊ : वैज्ञानिक ज्ञान के प्रभावी प्रसार तथा राजभाषा हिंदी में विज्ञान संचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सीएसआईआर–केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआई), लखनऊ द्वारा “वैश्विक परिप्रेक्ष्य में औषधि अनुसंधान एवं विकास” विषय पर वैज्ञानिक राजभाषा संगोष्ठी-2026 का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी में औषधि खोज, जैव-चिकित्सीय अनुसंधान तथा जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे समकालीन वैज्ञानिक विकास पर विचार-विमर्श के साथ-साथ वैज्ञानिक संचार में हिंदी की बढ़ती भूमिका पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी, के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे विज्ञान अधिक व्यापक, समावेशी एवं जनसुलभ बनेगा। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं से हिंदी में वैज्ञानिक लेखन एवं विज्ञान संचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पल्लव बागला, विज्ञान संपादक, एनडीटीवी ने “विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का जनसंचार: विकसित भारत की आवश्यकता” विषय पर प्रेरणादायी व्याख्यान दिया।

उन्होंने शोधकर्ताओं और समाज के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने तथा विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान संचार की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों की उल्लेखनीय उपलब्धियों से संबंधित प्रेरक वीडियो भी प्रस्तुत किए।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सुमन रे, वैज्ञानिक-एफ, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने “औषधि अनुसंधान एवं विकास: एक नीतिगत परिप्रेक्ष्य” विषय पर व्याख्यान देते हुए औषधि अनुसंधान, नवाचार तथा वैज्ञानिक प्रकाशन से संबंधित राष्ट्रीय एवं वैश्विक नीतिगत परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने वैज्ञानिक ज्ञान के व्यापक प्रसार में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी, की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

संगोष्ठी के अंतर्गत सीएसआईआर-सीडीआरआई के वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान भी प्रस्तुत किए गए। डॉ. ऋतु त्रिवेदी ने अस्थि अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान के योगदान तथा ऑस्टियोपोरोसिस संबंधी नवीन शोध उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

डॉ. पी. एन. यादव ने भारत के युवाओं में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों तथा उनके समाधान हेतु साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। डॉ. अजय श्रीवास्तव ने औषधि अनुसंधान को गति प्रदान करने तथा प्रयोगशाला में विकसित वैज्ञानिक खोजों को जनस्वास्थ्य के लिए उपयोगी उपचारों में परिवर्तित करने में रासायनिक विज्ञान की भूमिका पर व्याख्यान दिया।

कार्यक्रम का समापन सह-समन्वयक डॉ. संजीव यादव द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, अध्यक्ष, सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों, आयोजन समिति तथा कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले सभी सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. काशिफ हनीफ, वैज्ञानिक-एफ द्वारा किया गया। आयोजन में डॉ. संजीव यादव, वैज्ञानिक-ई तथा बिहारी कुमार, राजभाषा अनुभाग ने सह-समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस संगोष्ठी में लखनऊ के 20 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों से आए 350 से अधिक छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान आयोजित संवादात्मक सत्रों एवं विचार-विमर्श ने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा प्रतिभागियों के बीच हिंदी में विज्ञान संचार की भूमिका पर सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित किया।

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