कोलकाता: एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट चार सप्ताह पहले जहां से शुरू हुआ था, वहीं लौट आया है। ईस्ट बंगाल एफसी और मोहन बागान सुपर जायंट रविवार, 23 अगस्त, 2026 को एक बार फिर विवेकानंद युवा
भारती क्रीड़ांगन में 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के फाइनल में आमने-सामने होंगे।
खिताबी मुकाबला शाम 5 बजे शुरू होगा। 135वें इंडियनऑयल डूरंड कप के फाइनल का सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर सीधा प्रसारण और SonyLIV पर लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी। कोलकाता डर्बी को किसी परिचय की जरूरत नहीं है, लेकिन इस बार दोनों टीमों की परिस्थितियां इस मुकाबले को और भी खास बना रही हैं।
कोलकाता डर्बी में चिर प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान से होगी टक्कर
टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबले में मोहन बागान ने जीत हासिल की थी और तब से ईस्ट बंगाल लगातार उस नतीजे को पलटने का रास्ता तलाश रही है—वह भी उस मुकाबले में जहां जीत सबसे ज्यादा मायने रखती है।
135वें संस्करण की शुरुआत 25 जुलाई को हुई थी, जब ग्रुप ए में मोहन बागान सुपर जायंट और ईस्ट बंगाल एफसी आमने- सामने आए थे।
सहल अब्दुल समद के दूसरे हाफ के गोल ने बेहद कड़े और रणनीतिक रूप से सतर्क मुकाबले का फैसला किया और मेरिनर्स ने 1-0 से जीत हासिल की। यह इस अभियान में ईस्ट बंगाल की अब तक की एकमात्र हार है। इसके बाद फाइनल तक का उनका पूरा सफर जीत से भरा रहा है और हर जीत प्रभावशाली रही है।
ऐसे में रविवार के मुकाबले की कहानी साफ है—मोहन बागान टूर्नामेंट में अब तक अजेय रहने वाली एकमात्र टीम के रूप में उतर रही है, जबकि ईस्ट बंगाल के पास उस एकमात्र हार का बदला लेने की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
दोनों टीमों का साल्ट लेक स्टेडियम के फाइनल तक पहुंचने का सफर हालांकि अलग-अलग अंदाज में आगे बढ़ा है।
मोहन बागान ने ग्रुप ए में अपने तीनों मुकाबले जीतकर परफेक्ट रिकॉर्ड के साथ अभियान पूरा किया। डर्बी में जीत के बाद उसने साउथ यूनाइटेड एफसी को 8-0 से रौंदा, जिसमें मनवीर सिंह की हैट्रिक आकर्षण का केंद्र रही।
इसके बाद सीआईएसएफ प्रोटेक्टर्स के खिलाफ 6-0 की शानदार जीत के साथ ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया, जिसमें सहल ने पहले हाफ में ही अपनी हैट्रिक पूरी की।
शुरुआती हार के बाद ईस्ट बंगाल की वापसी भी उतनी ही जोरदार रही। सीआईएसएफ प्रोटेक्टर्स के खिलाफ 8-0 की
शानदार जीत मुख्य कोच एंटोनियो लोपेज हबास के कार्यकाल की पहली जीत बनी।
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इसके बाद साउथ यूनाइटेड एफसी के खिलाफ 5-0 की जीत ने उसे छह ग्रुपों में दूसरे स्थान पर रहने वाली दो सर्वश्रेष्ठ टीमों में शामिल करते हुए नॉकआउट चरण में पहुंचा दिया।
नॉकआउट दौर में चुनौतियां और कड़ी हुईं और दोनों टीमों ने उनका अलग-अलग अंदाज में जवाब दिया। ईस्ट बंगाल ने क्वार्टरफाइनल में पीवी विष्णु के 38वें मिनट के गोल की मदद से इंडियन आर्मी एफटी के खिलाफ 1-0 की संघर्षपूर्ण जीत दर्ज की।
इसके बाद स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली के खिलाफ गोलरहित सेमीफाइनल के बाद पेनल्टी शूटआउट में जीत हासिल कर
उसने फाइनल का टिकट पक्का किया। मोहन बागान का सफर भी कम तनावपूर्ण नहीं रहा।
जमशेदपुर एफसी के खिलाफ क्वार्टरफाइनल 1-1 से बराबर रहने के बाद मुकाबला मैराथन पेनल्टी शूटआउट में गया, जहां मेरिनर्स ने 9-8 से जीत हासिल की।
इसके बाद डिफेंडिंग चैंपियन नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी के खिलाफ बारिश से प्रभावित गोलरहित सेमीफाइनल का फैसला भी पेनल्टी से हुआ। गोलकीपर विशाल कैथ ने रॉबिन यादव और पार्थिब गोगोई के पेनल्टी बचाकर मोहन बागान को 4-3 से जीत दिलाई।
रविवार के फाइनल से पहले दोनों टीमों के आंकड़े उनकी असाधारण रक्षात्मक मजबूती को दर्शाते हैं। मोहन बागान ने छह मैचों में 16 गोल किए हैं और सिर्फ एक गोल गंवाया है। वहीं, ईस्ट बंगाल ने 14 गोल किए हैं और सिर्फ एक गोल खाया है—वह भी टूर्नामेंट के शुरुआती डर्बी में।
मोहन बागान की थोड़ी बेहतर गोल करने की क्षमता—जो मुख्य रूप से उनके प्रभावशाली ग्रुप चरण के प्रदर्शन पर
आधारित है—उन्हें आंकड़ों के लिहाज से मामूली बढ़त देती है।
हालांकि, ईस्ट बंगाल ने कम स्कोर वाले और दबाव से भरे नॉकआउट मुकाबलों में जीत हासिल करने की अद्भुत क्षमता दिखाई है। जरूरत पड़ने पर किसी भी तरह जीत हासिल करने की यह खूबी इतने बड़े फाइनल में उतनी ही महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
रविवार का यह महामुकाबला डूरंड कप के फाइनल में ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के बीच 13वीं भिड़ंत होगी। यह
प्रतिद्वंद्विता टूर्नामेंट के आजादी के बाद के इतिहास के कई दशकों से चली आ रही है।
दोनों क्लबों ने अब तक पांच-पांच बार डूरंड कप फाइनल जीता है। इसके अलावा दो फाइनल—जिनके बीच कई दशकों का अंतर रहा—संयुक्त चैंपियन घोषित किए जाने के साथ समाप्त हुए हैं।
यह बताता है कि निर्णायक चरण में भी यह मुकाबला कितना बराबरी का रहा है। दोनों के बीच सबसे हालिया फाइनल 2023 में हुआ था, जब दिमित्रियोस पेट्राटोस के 71वें मिनट के गोल की मदद से 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रहे मोहन बागान ने ईस्ट बंगाल को 1-0 से हराया था।
खिताब का संदर्भ इस मुकाबले की हर कहानी पर हावी है। रिकॉर्ड 17 बार डूरंड कप जीत चुकी मोहन बागान के पास अपने खिताबों की संख्या 18 करने और टूर्नामेंट के सबसे सफल क्लब के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करने का मौका है। वहीं, 16 खिताब जीत चुकी ईस्ट बंगाल अपने सबसे पुराने प्रतिद्वंद्वी के बराबर पहुंचने का प्रयास करेगी।
मोहन बागान के अभियान की व्यक्तिगत कहानी सहल के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्होंने शुरुआती डर्बी में विजयी गोल किया और फिर सीआईएसएफ प्रोटेक्टर्स के खिलाफ हैट्रिक लगाई। इस प्रदर्शन ने उन्हें पानागियोटिस डिल्म्पेरिस के आक्रमण का केंद्र बना दिया है। मनवीर सिंह ने भी गोल के दूसरे भरोसेमंद विकल्प के रूप में अपनी भूमिका निभाई है।
साउथ यूनाइटेड एफसी के खिलाफ उनकी हैट्रिक टीम की आक्रमण क्षमता की गहराई को दर्शाती है। वहीं, गोलकीपर विशाल कैथ ने बड़े मौकों पर बार-बार अपना महत्व साबित किया है।
सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआउट के दौरान किए गए उनके बचाव इसका ताजा उदाहरण हैं कि जब मुकाबले पेनल्टी तक पहुंचते हैं, तो वह टीम के लिए किस तरह निर्णायक साबित होते हैं।
ईस्ट बंगाल का सफर भी कुछ ऐसे ही अहम खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर टिका रहा है। कप्तान मोहम्मद बासिम
राशिद ने रचनात्मकता और सेट-पीस की जिम्मेदारी बखूबी संभाली है। उन्होंने अकेले सेमीफाइनल में दो बार गेंद को
क्रॉसबार से टकराया और इसके बाद शूटआउट में निर्णायक पेनल्टी को गोल में बदलकर टीम को फाइनल में पहुंचाया।
दूसरी ओर, गोलकीपर प्रब्सुखान सिंह गिल ने कैथ की तरह ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने एससी दिल्ली के
खिलाफ निर्धारित समय में एक पेनल्टी और शूटआउट में एक और पेनल्टी बचाकर ईस्ट बंगाल के अभियान को जीवित
रखा।
मोहन बागान की विकल्पों की गहराई भी दो नए खिलाड़ियों के आने से काफी बढ़ी है—ब्राजीलियाई मिडफील्डर मिगुएल फिगुएरा, जो उनके चिर प्रतिद्वंद्वी ईस्ट बंगाल से आए हैं, और भारत के अंतरराष्ट्रीय विंगर लालियांजुआला छांगते।
दोनों नॉकआउट चरण के लिए पंजीकृत हुए और नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी के खिलाफ सेमीफाइनल जीत में बेंच से मैदान पर उतरे। ऐसे में अगर फाइनल में खेल की गति बदलने की जरूरत पड़ती है, तो डिल्म्पेरिस के पास आक्रमण में दो नए शानदार विकल्प मौजूद होंगे।
रणनीतिक लिहाज से यह मुकाबला दो अलग-अलग शैलियों की टक्कर है। हबास ने ईस्ट बंगाल को रक्षात्मक संगठन और धैर्य के आधार पर तैयार किया है। टीम ऐसे मौकों पर गेंद अपने पास नहीं रखती जहां उससे कोई खास फायदा नहीं होता और फिर विंग से मिलने वाली गति के सहारे काउंटर अटैक करती है।
उनकी यह रणनीति टीम के खिलाड़ियों के चयन में भी दिखाई देती है और इंडियन आर्मी एफटी तथा एससी दिल्ली के खिलाफ मुकाबलों में भी देखने को मिली, जहां ईस्ट बंगाल ने दबाव झेलने के बाद पीवी विष्णु की रफ्तार और राशिद के सेट-पीस के जरिए अपने मौके बनाए।
हालांकि, हबास ने जोर देकर कहा है कि इस मुकाबले का महत्व टीम की रणनीति पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने
कहा, “कोलकाता डर्बी भारत में एक बेहद खास मुकाबला है, लेकिन हमें इसे किसी भी अन्य मैच की तरह ही खेलना होगा।
इतने बड़े मुकाबलों में आपको किसी अतिरिक्त प्रेरणा की जरूरत नहीं होती; आपको सिर्फ पूरे 90 मिनट तक अपनी
भावनाओं पर नियंत्रण रखना होता है। कोई बहाना नहीं चलेगा। आखिरकार, मैदान पर जो टीम अधिक समझदारी से
खेलेगी, वही मैच जीतेगी।”
डिल्म्पेरिस ने भी रक्षात्मक मजबूती से समझौता किए बिना अपनी टीम से गेंद पर अधिक नियंत्रण रखने की मांग की है। मोहन बागान का ग्रुप चरण में प्रदर्शन—तीन जीत, 15 गोल और एक भी गोल नहीं गंवाना—
एक ऐसी टीम की तस्वीर पेश करता है जो अपनी संरचना बनाए रखते हुए खिलाड़ियों को आगे भेजती है और काउंटर अटैक का इंतजार करने के बजाय मैदान के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण कायम करती है।
मोहन बागान के मुख्य कोच का मानना है कि इस मुकाबले में मानसिक मजबूती भी निर्णायक होगी। उन्होंने कहा, “ईस्ट बंगाल के पास बेहतरीन गुणवत्ता और अनुभव है, लेकिन हमारा लक्ष्य इस मैच को 90 मिनट में खत्म करना है। हमारी टीम में काफी अनुभव है, लेकिन इस तरह के मुकाबले में सिर्फ अनुभव काफी नहीं होता।
अगर आप जुनून के साथ नहीं खेलते हैं, तो यह समस्या बन जाती है। ऐसे मुकाबले मानसिक लड़ाई में जीते जाते हैं और कल हमें जीत हासिल करने के लिए अपनी भावनाओं पर पूरी तरह नियंत्रण रखना होगा।”
सामिर जेलीकोविच के लिए रविवार का मुकाबला कोलकाता डर्बी का पहला अनुभव होगा। मोहन बागान के खिलाड़ी ने
कहा, “कल मेरा पहला डर्बी होगा और भारतीय फुटबॉल के सबसे बड़े मुकाबले का हिस्सा बनने पर मुझे बेहद गर्व है।
हम टीम के साथ अच्छी तरह से तालमेल बिठा रहे हैं, हर दिन सुधार कर रहे हैं और हमारा पूरा ध्यान सिर्फ ट्रॉफी जीतने पर है।”
मुकाबले का नतीजा इस बात पर निर्भर कर सकता है कि कौन-सी रणनीति मैदान पर हावी रहती है—क्या ईस्ट बंगाल
मोहन बागान को आगे आने के लिए मजबूर करके उनके पीछे खाली जगह का फायदा उठाएगा,
या मोहन बागान शुरुआत से ही अपनी गति थोपेगा, जैसा उसने शुरुआती डर्बी में सहल के विजयी गोल से पहले किया था। ऐसे में फिगुएरा और छांगते बेंच से आकर टीम को ताजगी प्रदान करने वाले अहम विकल्प हो सकते हैं।
जो भी हो, रविवार का फाइनल इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट के लिए एक शानदार समापन का वादा करता है—वही दो क्लब, वही ऐतिहासिक मैदान और 90 मिनट के खेल पर टिकी इतिहास, प्रतिष्ठा और कोलकाता में बादशाहत की लड़ाई। और कौन जानता है, शायद एक बार फिर फैसला पेनल्टी शूटआउट से ही हो।













